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Monday, July 6, 2026

सेंट फ्रांसिस वर्ल्ड में जिले के पहले गंगा क्लब का गठन




-वन विभाग और जिला गंगा समिति की जिले के स्कूलों में अभिनव पहल

लियाकत मंसूरी

नित्य संदेश, मेरठ। स्कूली छात्रों को नदियों के प्रति जागरूक करने और संरक्षण के तरीके सिखाने के लिए वन विभाग और जिला गंगा समिति की ओर से जिले के स्कूलों में गंगा क्लब का गठन करने की अभिनव पहल शुरू की गई है। इसी कड़ी में सोमवार को लोहिया नगर स्थित सेंट फ्रांसिस वर्ल्ड स्कूल में जिले का पहला गंगा क्लब गठित किया गया। इस दौरान प्रभागीय निदेशक ने एक पौधा मां के नाम कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं को पौधों का वितरण भी किया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रभागीय निदेशक वंदना फौगाट और प्रिंसिपल मनीषा जैन ने दीप प्रज्जवलन करके किया। इस दौरान स्कूल प्रांगण में अतिथियों ने पौधारोपण किया। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्टीय बाल पुरस्कार से सम्मानित ईहा दीक्षित, अदविका, भावना, युविका, शास्वत समेत दस छात्र-छात्राओं का चयन गंगा क्लब के सदस्य और ब्रांड एंबेसडकर के रूप में किया गयां। सभी चयनित सदस्यों को प्रभागीय निदेशक ने कैप पहनाकर और बैज लगाकर सम्मानित किया। इस दौरान बच्चों ने पर्यावरण पर आधारित मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। प्रभागीय निदेशक ने गंगा क्लब के उद्देश्य और कार्यों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि पूरे शैक्षिक सत्र के दौरान गंगा क्विज, गंगा प्रोजेक्ट, गंगा स्वच्छता अभियान, टॉक शो, चित्रकला प्रतियोगिता आदि के माध्यम से छात्रों को जागरूक किया जाएगा। स्कूल परिसर में ईहा मेडिसिनल गार्डन को देखकर वन विभाग के अधिकारियों ने प्रशंसा की।



बच्चों को पौधे वितरित किए

प्रिंसिपल ने बताया कि मेडिसिनल गार्डन से अभिभावकों को निशुल्क बीज और पौधे भी प्रदान किए जाते हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने बच्चों को पौधे वितरित किए और प्रत्येक  माह पर स्कूल को प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने की बात कही। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण और जल संरक्षण विषय पर विभिन्न प्रश्न पूछे। प्रभागीय निदेशक ने बच्चों को बताया कि एक रिपोर्ट के अनुसार मेरठ का ग्र्रीन कवर अब 2.06 से बढ़कर 3.06 प्रतिशत हो गया है। यह जनसामान्य का पर्यावरण के प्रति लगाव का ही परिणाम है।



ये कहना है प्रिंसीपल का

कार्यक्रम के अंत में प्रिंसिपल मनीषा जैन ने कहा कि गंगा क्लब की स्थापना से बच्चों का न सिर्फ ज्ञानवर्धन होगा, बल्कि उन्हें अपनी नदियों के धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक लाभ की भी जानकारी होगी।

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