शामली जिला प्रशासन ने जेएस वॉटर एनर्जी लाइफ़ के नवाचार एवं सामुदायिक सहभागिता की सराहना की
नित्य संदेश ब्यूरो
शामली। जल संरक्षण एवं सतत विकास की दिशा में किए जा रहे अभिनव प्रयासों को नई पहचान देते हुए, शामली जिला प्रशासन ने जेएस वॉटर एनर्जी लाइफ़ द्वारा फाइकोरिमेडिएशन तकनीक के माध्यम से संचालित तालाब पुनर्जीवन कार्य की सराहना की है। यह पहल भारत सरकार के ह्यकैच द रेनह्ण अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप जल गुणवत्ता में प्राकृतिक सुधार, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्जीवन तथा जनभागीदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
जिला प्रशासन द्वारा साझा की गई एक सार्वजनिक पोस्ट में स्थानीय तालाबों के पुनर्जीवन हेतु अपनाई जा रही फाइकोरिमेडिएशन तकनीक को एक पर्यावरण-अनुकूल एवं विज्ञान-आधारित समाधान के रूप में रेखांकित किया गया। यह तकनीक डायटम्स (ऊ्रं३ङ्मे२) एवं प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं की सहायता से जल की गुणवत्ता में सुधार करती है। इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती, जिससे जलाशयों का दीर्घकालिक एवं सतत पारिस्थितिक पुनर्स्थापन संभव हो पाता है। प्रशासन ने प्राथमिक विद्यालय, खेड़ी बैरागी के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों द्वारा तालाब पुनर्जीवन अभियान के साथ चलाए गए स्वच्छता अभियान में सक्रिय सहभागिता की भी विशेष सराहना की। यह पहल प्रशासन, स्थानीय समुदाय और तकनीकी विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसहभागिता को सशक्त बनाती है। शामली जिला प्रशासन ने जल संरक्षण, स्वच्छ पारिस्थितिकी तंत्र एवं सतत विकास को बढ़ावा देने वाले नवाचारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि ऐसे विज्ञान-आधारित समाधान भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर कमोडोर डॉ. सुनील नंदा (सेवानिवृत्त, संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, जेएस वॉटर एनर्जी लाइफ़) ने कहा— शामली जिला प्रशासन द्वारा हमारे प्रयासों को मिली यह मान्यता हमारे लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। जेएस वॉटर एनर्जी लाइफ़ का विश्वास सदैव प्रकृति-आधारित समाधानों में रहा है। हमारी फाइकोरिमेडिएशन तकनीक बिना किसी रासायनिक हस्तक्षेप के प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से जल स्रोतों का पुनर्जीवन करती है। हम देशभर में सरकारों, स्थानीय प्रशासन और समुदायों के साथ मिलकर विज्ञान-आधारित एवं पर्यावरण-अनुकूल समाधानों के माध्यम से भारत के जल संसाधनों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।
यह पहल इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब प्रशासन, वैज्ञानिक नवाचार और स्थानीय समुदाय एक साझा उद्देश्य के साथ कार्य करते हैं, तो जल संरक्षण एवं पर्यावरणीय पुनर्स्थापन के क्षेत्र में स्थायी और प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। शामली में संचालित यह मॉडल देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में उभर रहा है।
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