• छात्रों, युवाओं के भविष्य, किसानों के संकट, उज्जैन भूमि घोटाले और चौतरफा भ्रष्टाचार पर प्रदेशव्यापी जनआंदोलन होगा— शोभा ओझा
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर इस पत्रकार वार्ता के माध्यम से मध्यप्रदेश कांग्रेस द्वारा प्रदेशभर में एक निर्णायक और चरणबद्ध जनआंदोलन प्रारंभ किया जा रहा है। यह आंदोलन प्रदेश के छात्रों, युवाओं, ठगे गए किसानों और शोषित आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा भ्रष्टाचार, घोटालों एवं सत्ता के घोर दुरुपयोग के विरुद्ध एक ऐतिहासिक लोकतांत्रिक संघर्ष का आगाज़ है। इस अभियान के माध्यम से हम भाजपा सरकार की विफलताओं के कुछ अत्यंत ज्वलंत मुद्दों को जनता के समक्ष रख रहे हैं:
• छात्रों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़, शिक्षा माफ़िया का राज...
मध्यप्रदेश में लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य को अंधकार में धकेला जा रहा है। पिछले दो दशक से भी अधिक समय से प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा की सरकार इस प्रदेश के माथे पर 'व्यापमं घोटाले' का कलंक पहले ही लगा चुकी थी, जिसमें 58 से अधिक मौतें हुई थीं, इसके साथ ही कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती घोटाला, पटवारी भर्ती घोटाला, फ़र्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र घोटाला, नर्सिंग घोटाला, पुलिस आरक्षक भर्ती घोटाला, शिक्षक भर्ती घोटाला, वनरक्षक भर्ती घोटाला, खाद्य निरीक्षक भर्ती घोटाला और परिवहन विभाग भर्ती घोटालों ने भी मध्यप्रदेश के छात्रों और बेरोज़गार युवाओं को समय समय पर छला है।
और अब NEET परीक्षा पेपर लीक में भी पूरे देश में हुई 12 मौतों में से दो मऊगंज की आकांक्षा चतुर्वेदी और धार की अवंतिका मौर्य मध्यप्रदेश की ही 'लाडली बेटियां' थीं। साफ़ है कि व्यापमं के बाद अब NEET, NET और CBSE परीक्षा से जुड़े महा-घोटालों तथा पेपर लीक की निरंतर घटनाओं ने देश और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की साख को तार-तार कर दिया है।
लाखों छात्र प्रभावित अकेले मध्यप्रदेश के 1.5 लाख से अधिक NEET परीक्षार्थी इस प्रणाली के भ्रष्टाचार के कारण मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं। पटवारी भर्ती घोटाले से लेकर हालिया परीक्षाओं तक, यह सरकार केवल 'क्लीन चिट' बांटने वाली मशीन बन चुकी है।
विपक्ष की आवाज़ प्रभावित विद्यार्थियों ने न्याय की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें लाठियां मिलीं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी ने संसद से सड़क तक युवाओं के साथ हुए इस ऐतिहासिक अन्याय का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।
• 'छात्रों की गूंज' अभियान
इन्हीं विषयों को लेकर प्रदेश कांग्रेस "छात्रों की गूंज" अभियान के माध्यम से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जाएगी और शिक्षा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और दोषियों को जेल भेजने की मांग करेगी।
• किसानों के साथ क्रूर मज़ाक (खाद की किल्लत और कालाबाजारी)...
खरीफ सीजन के पीक पर होने के बावजूद प्रदेश का अन्नदाता एक बार फिर खाद-बिजली के लिए ड़कों पर लाठियां खाने को मजबूर है खाद का हाहाकार : प्रदेश में इस समय डीएपी (DAP) और यूरिया की मांग की तुलना में 40% से अधिक की भारी कमी है। अनेक जिलों में डीएपी की अनुपलब्धता का फायदा उठाकर ₹1,350 की बोरी के बदले ₹1,800 से ₹2,000 तक की अवैध वसूली (कालाबाजारी) की जा रही है। किसानों को मजबूरन महंगे और अप्रभावी NPK खाद को खरीदने पर विवश किया जा रहा है।
टोकन राज और लाचार किसान टोकन व्यवस्था के चलते किसान 3-3 दिनों तक सोसायटियों के बाहर कतारों में सो रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में मात्र 4 से 5 घंटे ही बिजली मिल रही है, जिससे खरीफ की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
मूंग खरीदी में धोखा: सरकार ने मूंग खरीदी का कोटा इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में करीब 50% तक कम कर दिया है। समर्थन मूल्य (MSP) पर सीमित और कड़े नियमों के तहत खरीद होने के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचनी पड़ी है, जिससे किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। कांग्रेस इस किसान विरोधी नीति के खिलाफ गांव-गांव जाकर संघर्ष करेगी।
• उज्जैन भूमि महा-प्रकरण (मास्टर प्लान में हेरफेर).....
राष्ट्रीय समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जुड़े उज्जैन भूमि प्रकरण को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। भूमि आवंटन और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों पर आज तक प्रदेश की जनता को स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री पर लगे यह आरोप बेहद गंभीर हैं। उज्जैन का यह भूमि घोटाला प्रथमदृष्ट्या इतिहास का सबसे गंभीर "हितों के टकराव (conflict of interest)" का मामला प्रतीत हो रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री एवं उनके परिजनों द्वारा खरीदी गई जमीनों की 'टाइमिंग' व 'लोकेशन' यह दर्शाती है कि पूरे प्रकरण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
मोहन यादव 2021 में मंत्री बने और 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री बने। 2021 से 2025 के बीच परिवार और निकट रिश्तेदारों ने 194 प्लॉटों के रूप में लगभग 253 एकड़ ज़मीन खरीदी। इनमें से 2021-2023 में 57 प्लॉटों के रूप में 85 एकड़ और 2024-2025 में 137 प्लॉटों के रूप में 168 एकड़ जमीन खरीदी गई। परिवार व रिश्तेदारों के पास कुल 245 प्लॉटों के रूप में 335 एकड़ भूमि बताई गई है। परिवार से जुड़ी चार प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों सिद्धिविनायक डेवकॉन, श्री शिवदायिनी बिल्डकॉन, श्री अन्नपूर्णा कंस्ट्रक्शन और श्रेयम डेवलपर्स के माध्यम से ये ज़मीनें उन परियोजनाओं के पास खरीदी गई जो मोहन यादव के मंत्री और मुख्यमंत्री रहते आगे बढ़ीं जैसे उज्जैन-बदनावर रोड चौड़ीकरण, उज्जैन-इंदौर रोड चौड़ीकरण, उज्जैन-झालावाड़ फोर लेन निर्माण, उज्जैन-नागदा, उज्जैन-देवास, उज्जैन-आगर और उज्जैन-गरोठ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर। साफ़ प्रतीत हो रहा है कि conflict of interest का इससे गंभीर मामला दूसरा नहीं हो सकता लेकिन ऐसा लग रहा है कि विपक्षी नेताओं पर छोटे-मोटे मामलों में भी धावा बेहद निंदनीय और शर्मनाक है! बोल देने वाली ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स को मोहन यादव के घर का पता मालूम नहीं है, यह
• आस्था के नाम पर भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा...
भाजपा सरकार ने भगवान और अध्यात्म को भी अपनी कमीशनखोरी का जरिया बना लिया है। महाकाल लोक घोटाला: पहली ही तेज हवा और बारिश में महाकाल लोक की मूर्तियां खंडित हो गई। लोकायुक्त की जांच और सीएजी (CAG) की टिप्पणियों ने निर्माण कार्यों की घटिया गुणवत्ता और सार्वजनिक कार्रवाई हुई? धन के दुरुपयोग को प्रमाणित किया है। सरकार बताए कि इस महा-पाप के असली सूत्रधारों पर अब तक क्या
श्रीराम जन्मभूमि चंदा विवाद: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के चंदे और वित्तीय अनियमितताओं के जो आरोप सार्वजनिक हुए हैं, उसने देश के करोड़ों सनातनियों और श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि आस्था से जुड़े किसी भी पवित्र संस्थान में यदि ₹1 की भी हेराफेरी का आरोप लगता है, तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस के सरकार से 7 तीखे सवाल:
1. उज्जैन भूमि प्रकरण पर मुख्यमंत्री मोहन यादव सार्वजनिक रूप से 'प्रेस कॉन्फ्रेंस' कर जवाब कब देंगे?
क्या सरकार पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने को तैयार है?
2. प्रदेश भर में 1 रुपया या नाममात्र की रियायती दर पर किन-किन चहेते ट्रस्टों, नेताओं के करीबियों और संस्थाओं को सरकारी और बेशकीमती भूमियां आवंटित की गई हैं? इसकी सूची सरकार सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही?
3. किसानों को समय पर डीएपी, यूरिया, पर्याप्त बिजली और अन्य कृषि आदान उपलब्ध कराने में सरकार विफल क्यों रही?
खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की?
विद्यार्थियों को न्याय दिलाने तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए?
4. महाकाल लोक सहित सार्वजनिक परियोजनाओं में उठे सवालों की निष्पक्ष जांच कब होगी ?
भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए विशेष डिजिटल पोर्टल : 'MP Corruption Watch'
5. डिजिटल पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर लॉन्च करने जा रही है। भाजपा सरकार के संस्थागत भ्रष्टाचार को बेनकाब करने के लिए मध्यप्रदेश कांग्रेस शीघ्र ही एक विशेष डिजिटल पोर्टल और हेल्पलाइन नं. लान्च करने जा रहा है।
इस पोर्टल पर प्रदेश का कोई भी नागरिक, शासकीय कर्मचारी या व्हिसलब्लोअर भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, सरकारी जमीनों के अवैध कब्जों और बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, ऑडियो या वीडियो पूर्णतः गोपनीय बाद उन्हें जनता और न्यायालय के सामने लाया जाएगा। रूप से साझा कर सकेगा। जानकारी देने वाले की पहचान 100% गुप्त रखी जाएगी और तथ्यों की स्क्रूटनी के
6. चरणबद्ध आंदोलन
मध्यप्रदेश कांग्रेस इस सोई हुई सरकार को जगाने के लिए सड़कों पर उतर रही है:
प्रदेशभर में सिलसिलेवार पत्रकार वार्ताएं।
"छात्रों की गूंज" विरोध प्रदर्शन ।
युवाओं और छात्रों के अधिकारों के लिए इंदौर से भोपाल तक "Gen Z विशाल साइकिल रैली)। चरण ।
मुख्यमंत्री मोहन यादव जिस भी जिले के दौरे पर जाएंगे, वहां उनसे सार्वजनिक रूप से प्रश्न पूछे जायेगे।
भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव ।
उज्जैन में भूमि घोटाले के खिलाफ विशाल जनआंदोलन और रैली ।
7. आगामी विधानसभा सत्र के दौरान सदन के भीतर सरकार को इन मुद्दों पर पूरी तरह घेरा जाएगा।
मध्यप्रदेश कांग्रेस का यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि छात्रों, युवाओं के भविष्य, किसानों के अधिकार, पारदर्शी शासन, लोकतांत्रिक जवाबदेही और प्रदेश की जनता के हितों की रक्षा के लिए है। जब तक विद्यार्थियों को न्याय, किसानों को राहत, जनता को जवाब और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक कांग्रेस का यह आंदोलन यूं ही अनवरत जारी रहेगा।


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