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Friday, July 31, 2026

भारतीय दार्शनिक दिवस पर समाजशास्त्र विभाग में हुआ ज्ञानवर्धक विमर्श


नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में शुक्रवार को भारतीय दार्शनिक दिवस (Indian Philosophers' Day) का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।

कार्यक्रम के प्रारंभ में समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने भारतीय दर्शन की समृद्ध परंपरा तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय दार्शनिक परंपरा केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसके उपरांत कार्यक्रम संयोजक डॉ. देवकी नंदन भट्ट ने कार्यक्रम की विषय-वस्तु, उद्देश्य एवं रूपरेखा का परिचय प्रस्तुत किया तथा भारतीय दार्शनिक चिंतन के अध्ययन की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का कुशल संचालन शोधार्थी सोनल भूषण द्वारा किया गया।

मुख्य वक्ता डॉ. वरुण गुलाटी ने अपने व्याख्यान में आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदान्त, न्याय दर्शन तथा मीमांसा दर्शन के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय दार्शनिक परंपरा की तार्किकता, ज्ञानमीमांसा तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण को सरल एवं प्रभावशाली उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके उपरांत विश्वविद्यालय के शोध निदेशक प्रो. बीर पाल सिंह ने अपने संबोधन में भारतीय दर्शन को भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला बताते हुए कहा कि दार्शनिक चिंतन केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है। कला संकायाध्यक्ष प्रो. अतवीर सिंह ने कहा कि भारतीय दर्शन केवल एक विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।

द्वितीय मुख्य वक्ता डॉ. आदित्य कुमार गुप्ता ने भारतीय दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जीवन तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय दार्शनिक परंपरा विश्व बंधुत्व, शांति, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों की स्थापना का सशक्त माध्यम है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण प्रो. नीलू जैन गुप्ता, प्रो. जे. एस. सिद्दीकी, डॉ. विजेता गौतम, डॉ. भावना, डॉ. मुनेश, डॉ. विवेक नौटियाल, डॉ. प्रशांत, डॉ. आशीष कौशिक तथा डॉ. विद्या सागर सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। व्याख्यानों के पश्चात प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में कुल 180 प्रतिभागी उपस्थित रहे। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। इस समारोह में विभाग के अन्य शिक्षक डॉ. वाई. पी. सिंह, डॉ. नेहा गर्ग तथा डॉ. अजीत सिंह सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी अंशुल शर्मा, जय मलिक, अंकुर बालियान, अदिति, सुप्रिया, अपेक्षा चौधरी, सारिका, नबील, सुमित एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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