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Thursday, July 23, 2026

लगभग 3000 बच्चों के साथ पेरेंट्स भी सड़कों पर उतरे, 'युवा न्याय यात्रा' की तैयारी

मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा स्टूडेंट कॉरिडोर बना आंदोलन की धुरी, भंवरकुआं में NEET पेपर लीक धरने का 24वां दिन


नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। मप्र. की आर्थिक राजधानी इंदौर का सबसे बड़ा स्टूडेंट हब भंवरकुआं इन दिनों पढ़ाई के शोर से नहीं, बल्कि इंसाफ की मांगों से गूंज रहा है। NEET पेपर लीक मामले को लेकर 30 जून को कुछ छात्रों से शुरू हुआ प्रदर्शन अब 24वें दिन एक विशाल जनआंदोलन का रूप ले चुका है।


टंट्या भील चौराहे पर बुधवार को 3,000 से ज्यादा छात्र, कोचिंग शिक्षक, अभिभावक और स्थानीय नागरिक एक साथ धरने पर बैठ गए। बारिश की बौछारों के बीच भी युवाओं का हौसला कम नहीं हुआ और छात्र भंवरकुआं फ्लाईओवर के नीचे बैनर-पोस्टर लेकर नारेबाजी करते रहे।


फ्लाईओवर के नीचे दिन-रात डटे छात्र

बुधवार सुबह से लेकर देर रात तक टंट्या भील चौराहे पर 'न्याय दो' और 'पेपर लीक के दोषियों को सजा दो' के नारे गूंजते रहे। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगें हैं- नीट पेपर लीक के मास्टरमाइंड्स पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें।


रात में जैसे ही एक जत्था आराम करने जाता, दूसरा ग्रुप माइक संभाल लेता। स्थिति यह रही कि देर रात तक शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग छात्रों को समर्थन देने भंवरकुआं पहुंचते रहे।


आंदोलनकारियों ने अब अपने विरोध को और धार देने के लिए  भंवरकुआं से 'युवा न्याय यात्रा' निकालने की घोषणा की है। इस यात्रा का मकसद इंदौर और आसपास के जिलों के आम नागरिकों को जोड़ना है ताकि परीक्षा तंत्र की साख बचाई जा सके। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी मंगलवार देर रात धरना स्थल पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों को जायज ठहराते हुए समर्थन का ऐलान किया।

आंदोलन के मुख्य बिंदु

प्रदर्शनकारियों की संख्या: 3,000 से अधिक (छात्र, शिक्षक, अभिभावक व नागरिक)।

• मुख्य मांग: पेपर लीक दोषियों पर कार्रवाई और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।

• अगला कदम: भंवरकुआं से शहर में 'युवा न्याय यात्रा' का आयोजन।


क्या बोले आंदोलनकारी?

भंवरकुआं इलाका देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, होल्कर साइंस कॉलेज और माता जीजाबाई कॉलेज जैसी बड़ी संस्थाओं से घिरा है। यहां यूपीएससी, एमपीपीएससी, नीट और जेईई की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हॉस्टलों और पीजी में रहते हैं। मध्य प्रदेश के इस सबसे बड़े एजुकेशन कॉरिडोर में उपजा यह असंतोष अब राज्यभर के युवाओं की आवाज बनता जा रहा है।

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