• ध्वजारोहण के साथ श्री ब्रह्मोत्सव का शुभारंभ हुआ
• स्वर्ण मंगल गिरि पर निकलेगी महालक्ष्मी जी की यात्रा
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। पावन सिद्ध धाम श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग में 10 जुलाई से सप्त दिवसीय श्री ब्रह्मोत्सव एवं रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
अखिल कोटि ब्रह्माण्ड नायक मुखोल्लास करने वाले श्री प्रभु वेंकटेश जी का यह दिव्य उत्सव है। सात दिनों तक सतत अनेक नित नए श्रंगार दर्शन, नित नए उत्सव के साथ सम्पन्न होगा। इस अवसर पर 10 जुलाई को प्रातः 7.15 बजे से वेंकट रमण गोविंदा, श्री निवास गोविंदा नाम जप परिक्रमा निकली तत्पश्चात प्रभु वेंकटेश की श्रंगार आरती की गई।
साथ ही श्री ब्रह्मोत्सव का ध्वजारोहण के साथ शुभारंभ हुआ जिसमे बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। दक्षिण भारतीय नाद स्वरम की गोविंदा-गोविंदा की मधुर धुन के साथ भक्तो ने तालिया बजाकर अपना उत्साह प्रगट किया। हर भक्त चाहे महिला हो या पुरुष वर्ग सभी के सिर पर वैष्णव रामानुज सम्प्रदाय का तिलक सुशोभित किया गया था जिसे उत्सव का आनंद दोगुना हो गया था।
स्वर्ण से निर्मित बड़े से गरुड़ स्तम्भ पर प्रभु वेंकटेश जी के सम्मुख रामानुजाचार्य नागोरिया पीठाधिपति स्वामीजी श्रीविष्णुप्रपन्नाचार्यजी महाराज द्वारा शास्त्रोक्त पद्धति से दक्षिण भारत से पधारे भटर स्वामियों द्वारा पूजन कराकर स्तोत्र पाठ कर सफ़ेद वस्त्र पर निर्मित ध्वज जिस पर भगवान गरुड़ को विराजमान किया गया था ध्वज को स्वर्ण स्तम्भ पर चढ़ा कर उनका पूजन कर उन्हें गुड़ के चावल के लड्डू बनाकर भोग अर्पित किया गया इसके साथ ही श्री ब्रह्मोत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ।
गरुड़ ध्वजा आरोहण क्यों?
ब्रह्मांड में व्याप्त आपदाएं आंधी तूफान बवंडर इत्यादि प्राकृतिक आपदाओं के निवारण एवं निर्विघ्न संपूर्ण उत्सव संपन्न होने की भावना से श्री ब्रह्मोत्सव का शुभारंभ श्री गरुड़ ध्वजा पूजन एवं दिव्य देश (स्वर्ण खंभ) पर गरुड़ ध्वजा आरोहण से किया जाता है।
भगवान विष्णु के अतिप्रिय वाहन गरुड़ जी वायुमंडल में व्याप्त व्याधियों का हरण करते हुए ब्रह्मोत्सव को पूर्ण सफलता के साथ संपन्न करते हैं ऐसा भक्तों का भाव है इसलिए महोत्सव में सर्वप्रथम गरुड़ ध्वजा का आरोहण की रामानुज संप्रदाय में परंपरा है । साथ ही वायुमंडल में विराजित गरुड़ जी से गौ संरक्षण, राष्ट्र प्रेम, नैतिक मूल्यों की स्थापना, विचारों की शुद्धि की कामना भी प्रत्येक उपस्थित वैष्णव जन करते हैं।
ध्वजारोहण के साथ ही अंकुरापण, कंकणधारण , व विद्धजनो के वरण किया गया। साथ ही देवस्थान में सप्त दिवसीय यज्ञ देवता का पुजन कर यज्ञ प्रारम्भ हुआ।
देवस्थान के पुजारी सुदर्शन दीपक, शिवम पांडे, सुरेश प्रमोद, नितिन द्वारा यजमान रमेश चितलांगया परिवार को संकल्प कराकर रजत कलशों का पूजन कर कलशों की सहस्त्रधारा से शेषावतार श्रीरामानुज स्वामीजी महाराज का महाभिषेक किया गया ।
इस अवसर पर श्री रामानुज स्वामीजी की स्वर्ण पुष्प व रजत पुष्प से अर्चना की गई।इसके पश्चात संत सभा का आयोजन किया गया नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामीजी श्री विष्णुप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने सभी भक्तों को संबोधित करते कहा प्रभु दर्शन की जो लालसा हैं उनकी सेवा करने की जो लालसा हैं कार्य करने की जो अभिलाषाएं हैं उसे हमारे समस्त प्रकार के मनोरथ हमारे पूर्ण हो जाते हैं कब हो जाते हैं जब हम एक शरणागत वैष्णव के भाव के अनुरूप यहां पधारे की ठाकुर जी का उत्सव चल रहा है जिस प्रकार संसार के संबंधों को निभाने के लिए ना चाहते हुए भी कितनी चेष्टा करनी पड़ती है वैसेही प्रभु के उत्सव में जाने का प्रयत्न करना चाहिए जब मंदिर प्रांगण में प्रवेश करे तो कम से कम 24 घंटा जब तक यहां रहे सांसारिक बातों को विराम देना है कुछ उत्सव इत्यादि का प्रकल्प चल रहा है तो उसमें सम्मिलित हो नहीं तो ठाकुर जी का नाम जप करें अन्य वार्तालाप नहीं करना
युवराज स्वामीजी श्री माधवप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा भक्तों के मन में आचार्य कौन जो जीव मात्र को भगवान के चरणों में शरणागति करने वाला होता है वह भी तो आचार्य है इसलिए हमारे आचार्य हमारे लिए भगवत स्वरूप है या देवी तथा गुरु जैसे भगवान में हमारा भाव है वैसे हमारे आचार्य में भी हमारी बुद्धि होनी ही चाहिए यह हमारा शिष्य लक्षण है क्यों क्योंकि भगवान के चरणों का मार्ग दिखाने वाले आचार्य चरण है और इन आचार्य चरणों में जिन भगवान का मार्ग दिखाया है अर्थात आचार्य चरणों का हमेशा सम्मान करो ओर पुरे भाव से आज्ञा का पालन करो। उन्होंने हमें वह भगवान कैसे हैं उन्होंने शेषाचंल पर्वत पर विराजमान श्री वेंकटेश महाप्रभु के चरणों में हमारी शरणागति कराई है। परमात्मा के जितनी जो शरणागति हमारी आचार्य चरणों में है। साथ ही इस अवसर पर अयोध्या से श्री अनंताचार्य स्वामीजी व मुमुक्षराम जी महाराज पधारें।
साथ ही आज विशेष श्रंगार का अदभुत नजारा था प्रभु वेंकटेश जी बर्फीली घाटी में शेष नाग की छाया में विराजित होकर भक्तों को।अदभुत दर्शन दे रहे थे बर्फ की घाटी में बर्फ की बारिश हो रही थी साथ ही जल का प्रवाह भी जगह जगह पर दिख रहा था।
मिडिया प्रभारी पंकज तोतला ने जानकारी देते हुए बताया इस अवसर पर समिति के सुरेशचंद्र राठी, रवि सिंगी, संपत धुत,गोविंद झंवर, लछु लड़ा, प्रमोद गट्टानी, आनंद बजाज, गिरीश जाखेटिया, हर्ष पसारी, नीलेश तोतला आदि मौजूद थे।


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