नित्य संदेश।
नमस्कार साथियों,
एक कैंसर सर्जन के रूप में, मेरा रोज़ का काम ऑपरेशन थिएटर के भीतर इस बीमारी से लड़ना है। लेकिन आज, '*वर्ल्ड कैंसर सर्वाइवर्स डे*’के अवसर पर, मैं थिएटर से बाहर आकर आपसे एक बेहद ज़रूरी विषय पर बात करना चाहता हूँ: कैंसर को शुरू होने से पहले कैसे रोका जाए, और इसे उस स्टेज पर कैसे पकड़ा जाए जब यह पूरी तरह ठीक हो सकता है।
बहुत से लोग डर के मारे कैंसर के बारे में बात करने से कतराते हैं। लेकिन एक डॉक्टर के नाते मैं आपको बता सकता हूँ कि जब आपके पास एक सही योजना होती है, तो डर अपने आप खत्म हो जाता है। आज दो चीज़ों की वजह से दुनिया में पहले के मुकाबले कहीं ज़्यादा लोग कैंसर को हरा रहे हैं: जीवनशैली में बदलाव और सही समय पर बीमारी की पहचान।
अपनी और अपने प्रियजनों की सेहत की रक्षा के लिए आप आज ही से ये कदम उठा सकते हैं:
1. रोकथाम की ताकत (जो आपके नियंत्रण में है)
दुनिया भर में कैंसर के लगभग 30% से 50% मामलों को सिर्फ अपनी आदतों को सुधारकर रोका जा सकता है। आपकी छोटी-छोटी और सही आदतें आगे चलकर बड़ा बदलाव लाती हैं:
तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं: सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या खैनी का सेवन आज भी दुनिया में कैंसर का सबसे बड़ा और टलने योग्य कारण है।
थाली को रंग-बिरंगा बनाएं: अपने भोजन में साबुत अनाज, हरी सब्ज़ियाँ और ताज़े फलों को ज़्यादा से ज़्यादा शामिल करें। पैक्ड/प्रोसेस्ड फूड और रेड मीट (लाल मांस) का सेवन कम करें।
सक्रिय रहें: रोज़ाना शारीरिक व्यायाम करें और अपने वजन को नियंत्रित रखें।
धूप और वायरस से बचाव: तेज़ धूप (अल्ट्रावायलेट किरणों) से अपनी त्वचा को बचाएं। साथ ही, कैंसर का कारण बनने वाले वायरस से बचने के लिए एचपीवी (HPV) और हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) के टीके ज़रूर लगवाएं।
2. शुरुआती पहचान की ताकत (अपने शरीर की आवाज़ सुनें)
जब कैंसर की पहचान शुरुआती दौर में हो जाती है, तो इसका इलाज बेहद आसान और कई बार पूरी तरह संभव होता है। अपने शरीर में होने वाले किसी भी लगातार बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें। कैंसर के इन शुरुआती संकेतों (C-A-U-T-I-O-N) को हमेशा याद रखें:
C (Change): मल या मूत्र विसर्जन की आदतों में अचानक और लगातार बदलाव आना।
A (A sore): शरीर पर कोई ऐसा घाव या छाला जो लंबे समय तक न भरे।
U (Unusual bleeding): शरीर के किसी भी हिस्से से असामान्य रूप से खून या डिस्चार्ज होना।
T (Thickening): स्तन (Breast) या शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ का महसूस होना।
I (Indigestion): लगातार बदहजमी रहना या खाना निगलने में तकलीफ होना।
O (Obvious change): शरीर के किसी मस्से या तिल के रंग और आकार में अचानक बदलाव आना।
N (Nagging cough): हफ़्तों तक लगातार खांसी रहना या आवाज़ का बैठ जाना।
3. रूटीन स्क्रीनिंग (जांच) से न कतराएं
कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट (जैसे मैमोग्राफी, कोलोनोस्कोपी और पैप स्मियर) इसलिए बने हैं ताकि बीमारी के लक्षण दिखने से पहले ही शरीर के भीतर हो रहे बदलावों को पकड़ा जा सके। अगर आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है, या आपके परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है, तो अपने डॉक्टर से मिलकर अपने लिए एक सही स्क्रीनिंग शेड्यूल ज़रूर तय करें।
आज अपनी सेहत पर ध्यान देना, आपके सुरक्षित कल का सबसे बेहतरीन बीमा है। इस जानकारी को उनके साथ ज़रूर शेयर करें जिनकी आप परवाह करते हैं!
शुभकामनाओं सहित,
डॉ. उमंग मित्थल
मेरठ कैंसर हॉस्पिटल
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