नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। एकता का प्रतीक प्रांतीय मेला नौचंदी समिति एवं हर्फ़कार फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में महफ़िल-ए-मुशायरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित शायर अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में शिक्षाविद, समाजसेवी, प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य अतिथि रहे।
डॉ ममतेश गुप्ता ने कहा साहित्य दिलों को जोड़ती है इस तरह के कार्यक्रम देश की साझा संस्कृति को बढ़ावा देती है कार्यक्रम सयोजक हर्फाफ़कार फाउंडेशन के डॉक्टर ताबिश फरीद ने कहा हमारी कोशिश रहती है शायरी को वह स्थान दिलाया जाए जो पहले कभी मेरठ के मुशायरों का हुआ करता था उन्होंने सभी का धन्यवाद प्रकट किया
मुख्य अतथि कुंवर शेखर विजेंद्र चांसलर शोभित यूनिवर्सिटी ने कहा के इस समय में साहित्य, कविता और मुशायरे केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि समाज को जोड़ने वाले सशक्त माध्यम हैं। ऐसे मंच भाषा, विचार और संवेदनाओं के माध्यम से हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करते हैं तथा विविधताओं में एकता की भारतीय परंपरा को सुदृढ़ बनाते हैं। नौचंदी मेला सदियों से मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा है। महफ़िल-ए-मुशायरा जैसी पहलें इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। मुझे प्रसन्नता है कि नौचंदी मेला समिति, मेरठ तथा हर्फ़कार फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सद्भाव को एक मंच पर लाने का सराहनीय प्रयास किया है। मैं डॉ. तबिश फ़रीद, हर्फ़कार फ़ाउंडेशन की समस्त टीम, नौचंदी मेला समिति तथा इस आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। देश के प्रतिष्ठित शायरों, साहित्यकारों और सुधी श्रोताओं की सहभागिता ने इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया है। मुझे विश्वास है कि साहित्य और संस्कृति के ऐसे आयोजन समाज में संवाद, सौहार्द, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को और अधिक सशक्त करेंगे तथा हमारी साझा सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।
अस्ल चेहरा दिखा के मानूँगा
नाम का आईना नहीं हूँ मैं
—अनिल शर्मा “तन्हा”
दिल तो ये कह रहा था उसे भूल जाऊँ मैं
दिन रात कोशिशों से भुलाया नहीं गया
—कंचन शर्मा
ये क्या नक़ाब को रुख से उठा दिया तुमने,
हर एक दाग़े जिगर जगमगा दिया तुमने
—फैज़ान कश्मीरी
वीरान हो गया हूं, मैं बर्बाद हो गया
खेला है खेल आपने वो जिंदगी के साथ
—मुरसलीन माहिर मेरठी
ये ग़म अच्छे नहीं लगते खुशी अच्छी नहीं लगती,
तुम्हारे बाद हमको जिंदगी अच्छी नहीं लगती,
—फैसल मेरठी
इससे बड़ी है क्या कोई तौहीन और भी,
मैं तुझ से मिल के हो गया ग़मगीन और भी।
—गुफरान जावेद मेरठ
कैसे ख़ुद को वो ढाल लेते हैं
जिस्म से जां निकाल लेते हैं
बूढ़े माँ बाप को भगा करके
लोग कुत्तों को पाल लेते हैं…
—डा. ओम शर्मा ओम
मेरे अहसास ढीले हो रहें है
नयन के कोर गीले हो रहें है
कहीं अर्थी उठाई जा रही है
किसी के हाथ पीले हो रहें हैं
—वन्दना "अनम"
कुछ रोज़ का मेला है चका चौंध देख लो
फिर तुम भी चले जाओगे इज़हार क़ब्र में
— उमर इज़हार
कार्यक्रम में विभिन्न सलों से आए मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया कार्यक्रम में विख्यात शायर डाॅ. बशीर बद्र को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर इंजीनियर रिफत जमाली, ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा नबील अनवर, डॉक्टर हारिस महमूद, नासिर सेफी, कार्यक्रम का संचालन शहबाज तालिब ने की।


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