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Tuesday, June 2, 2026

नवाचार से व्यवसाय तक: आईपीआर प्रबंधन पर सुभारती विश्वविद्यालय में विशेष कार्यशाला आयोजित

नित्य संदेश ब्यूरो 

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के भाषा विभाग, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय द्वारा संस्थान नवाचार परिषद (IIC), एसवीएसयू के सहयोग से “Protecting IPR and IP Management for Start-ups” विषय पर एक महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन भाषा विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा के निर्देशन में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा नवोदित उद्यमियों को बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के महत्व, संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था।


 

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) सुधा रानी, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, शहीद मंगल पांडेय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मेरठ के स्वागत के साथ हुआ। अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. सीमा शर्मा ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी एवं नवाचार-प्रधान युग में बौद्धिक संपदा अधिकार किसी भी स्टार्ट-अप की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों को अपने नवाचारों के संरक्षण के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) सुधा रानी ने अपने विस्तृत व्याख्यान में बौद्धिक संपदा अधिकारों की मूल अवधारणाओं तथा स्टार्ट-अप्स के विकास में उनकी रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और व्यापारिक गोपनीयता (Trade Secrets) जैसे विभिन्न बौद्धिक संपदा अधिकारों को सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने बताया कि किसी भी नवाचार की सफलता केवल उसके निर्माण में नहीं, बल्कि उसके उचित संरक्षण और प्रबंधन में भी निहित होती है।


 

उन्होंने प्रतिभागियों को बौद्धिक संपदा के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, लागत प्रभावी पंजीकरण प्रक्रियाओं तथा नवाचारों के व्यवसायीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार सही समय पर पेटेंट या ट्रेडमार्क पंजीकरण कराकर स्टार्ट-अप्स अपने विचारों और उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान कर सकते हैं। कार्यशाला का एक विशेष आकर्षण विभिन्न केस स्टडीज़ की प्रस्तुति रही, जिनके माध्यम से स्टार्ट-अप्स द्वारा की जाने वाली सामान्य बौद्धिक संपदा संबंधी त्रुटियों तथा उनसे बचाव के उपायों को विस्तार से समझाया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने पेटेंट आवेदन प्रक्रिया, डिजिटल सामग्री के कॉपीराइट संरक्षण तथा ट्रेडमार्क पंजीकरण से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. सुधा रानी ने व्यावहारिक और संतोषजनक उत्तर देकर समाधान किया।

 

यह कार्यशाला संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) 4 – गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा SDG 9 – उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना के उद्देश्यों के अनुरूप आयोजित की गई। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों में बौद्धिक संपदा के सृजन, संरक्षण तथा उसके आर्थिक उपयोग के प्रति जागरूकता विकसित हुई। साथ ही प्रारंभिक स्तर के स्टार्टअप्स के लिए उपयोगी और किफायती बौद्धिक संपदा प्रबंधन प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी भी प्राप्त हुई। कार्यक्रम में डॉ. रफत खानम, डॉ. मनीषा लूथरा, डॉ. निशी राघव, डॉ. यशपाल, डॉ. स्वाति शर्मा, डॉ. आशीष कुमार, अंकित कुमार, डॉ. प्रीति शर्मा, सुश्री प्रज्ञा, डॉ. आकांक्षा सिंह, भावना जोशी एवं सोनी चौहान सहित अनेक शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


 

कार्यक्रम का समापन समूह छायाचित्र एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. सीमा शर्मा ने मुख्य वक्ता डॉ. सुधा रानी तथा संस्थान नवाचार परिषद (IIC), सुभारती विश्वविद्यालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान नैतिकता और उद्यमशीलता की भावना को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। 

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