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Wednesday, June 3, 2026

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नित्य योग शिविर का तृतीय दिवस संपन्न



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नित्य योग शिविर के तृतीय दिवस का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण एवं मंगलाचरण के साथ अत्यंत श्रद्धा एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं योग साधकों ने सहभागिता कर योगाभ्यास एवं आध्यात्मिक चिंतन का लाभ प्राप्त किया।


इस अवसर पर योगाचार्य अमरपाल ने बताया कि अनासक्त भाव से कर्म करना ही मनुष्य का प्रथम और सर्वोच्च कर्तव्य है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्मयोग का संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि मनुष्य को कभी भी यज्ञ, तप और दान का त्याग नहीं करना चाहिए। ये तीनों जीवन को पवित्र, संतुलित और समाजोपयोगी बनाने वाले आधार स्तंभ हैं। योगाचार्य अमरपाल ने कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश लोग कर्म तो करते हैं, किंतु उसके फल की अत्यधिक चिंता और अपेक्षा के कारण मानसिक तनाव, चिंता एवं असंतोष का अनुभव करते हैं। गीता का संदेश हमें सिखाता है कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करना चाहिए, परंतु कर्म के फल के प्रति आसक्ति नहीं रखनी चाहिए। जब व्यक्ति फल की चिंता से मुक्त होकर कर्म करता है, तब उसका मन अधिक एकाग्र, शांत और प्रसन्न रहता है।


उन्होंने आगे कहा कि शास्त्रों में कर्म के आधार पर विहित कर्म एवं नित्य कर्म का वर्णन किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने दायित्वों का निर्वहन धर्मसम्मत एवं नैतिक मूल्यों के अनुरूप करना चाहिए। कर्मयोगी के लिए आवश्यक है कि वह कर्मफल के त्याग की भावना को अपनाए और अपने कार्यों को ईश्वरार्पण बुद्धि से संपन्न करे। वहीं ज्ञानयोग के साधक को स्वयं के कर्तापन के अहंकार का त्याग विष के समान कर देना चाहिए। जब व्यक्ति यह समझ लेता है कि वह केवल एक माध्यम है और समस्त कार्य परम सत्ता की प्रेरणा से संपन्न हो रहे हैं, तब उसके भीतर विनम्रता, समता और आत्मिक शांति का विकास होता है। योगाचार्य अमरपाल ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, अनुशासित और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने की एक संपूर्ण जीवन पद्धति है। नियमित योगाभ्यास मनुष्य को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिरता तथा आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। योग का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को स्वयं से जोड़ना और उसके भीतर छिपी सकारात्मक शक्तियों को जागृत करना है। 


योग सत्र के दौरान प्रतिभागियों को सूक्ष्म व्यायामों के माध्यम से शरीर को सक्रिय एवं लचीला बनाने का अभ्यास कराया गया। इसके पश्चात पर्वतासन, त्रिकोणासन, नौकासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया गया। साथ ही नाड़ी शोधन, चंद्रभेदी, शीतली एवं भ्रामरी प्राणायाम का विधिवत अभ्यास कराते हुए उनके स्वास्थ्य संबंधी लाभों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि नियमित प्राणायाम से श्वसन तंत्र सुदृढ़ होता है, मानसिक तनाव कम होता है तथा मन में शांति एवं सकारात्मकता का संचार होता है। शिविर में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने योगाभ्यास एवं आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से स्वस्थ एवं संतुलित जीवन शैली अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार त्यागी, डॉ. कमल शर्मा, अनुज बैसला, पुष्पेंद्र कुमार, शिवानंद, नंदिनी, ओजस्वी, राधा, ज्योति सहित अनेक योग साधक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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