नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नित्य योग शिविर के छठे दिन योग साधकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ, जिससे पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ। इसके पश्चात योग सत्र में प्रतिभागियों को सूर्य नमस्कार, विभिन्न योगासन, प्राणायाम तथा योग निद्रा का अभ्यास कराया गया।
इस अवसर पर योग आचार्य अमरपाल ने योग के वास्तविक स्वरूप और उसकी व्यापक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग का अर्थ केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि "जोड़ना", "एकता स्थापित करना" और "संतुलन साधना" है। योग व्यक्ति को स्वयं से, समाज से और प्रकृति से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में योग मनुष्य को भीतर की शांति प्रदान करता है तथा जीवन की विभिन्न चुनौतियों के बीच संतुलन बनाए रखने की शक्ति देता है। उन्होंने कहा कि योग का तात्पर्य केवल आसनों का अभ्यास या सैद्धांतिक विचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति और श्रेष्ठ आचरण है। योग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास का आधार है। यह जीवन के प्रत्येक स्तर पर शुद्धता, संयम और संतुलन स्थापित करने का एक सकारात्मक आंदोलन है। योग हमें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाता है तथा समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराता है।
योग आचार्य अमरपाल ने कहा कि पृथ्वी हमारे जीवन का आधार है। वायु, जल, अन्न और ऊर्जा जैसे सभी संसाधन हमें प्रकृति से प्राप्त होते हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो मानव जीवन का संतुलन बिगड़ जाएगा। योग हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता है। योग के माध्यम से व्यक्ति में शांति, संयम और संतुलन का विकास होता है, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि "योग से संतुलन, संतुलन से संरक्षण और संरक्षण से समृद्ध पृथ्वी" का संदेश आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वसुंधरा हमारी माता है और उसका संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। योग हमें यही शिक्षा देता है कि हम प्रकृति के संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का निर्माण करें।
योग शिविर में उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास के माध्यम से शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक एकाग्रता और आत्मिक शांति का अनुभव किया। योग निद्रा के अभ्यास ने प्रतिभागियों को तनावमुक्त रहने तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने के उपायों से भी परिचित कराया। कार्यक्रम में डॉ. धर्मेंद्र के साथ योग विज्ञान विभाग के शिक्षक कमल शर्मा, अंजु मलिक, ईशा पटेल, अरुण सिसोदिया, अभिषेक कुमार, अवनीश कुमार तथा योग विज्ञान विभाग के अनेक विद्यार्थी एवं योग साधक उपस्थित रहे। सभी ने नियमित योगाभ्यास को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। शिविर का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।


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