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Saturday, June 6, 2026

'वामा साहित्य मंच' की अनूठी मासिक गोष्ठी खेल और लेखन के अंतर्संबंधों पर हुई सार्थक चर्चा

सपना सी.पी. साहू 

नित्य संदेश, इंदौर। ​वामा साहित्य मंच (शब्द-शक्ति की संवाहक) द्वारा 'खेल पर लेखन खेल नहीं...' विषय पर एक अनूठी और विचारोत्तेजक मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ डॉ. आराधना तिवारी द्वारा प्रस्तुत सुंदर वाग्देवी वंदना से हुआ। कार्यक्रम की भावभूमि रखते हुए मंच की अध्यक्ष ज्योति जैन ने इस बात पर चिंता जताई कि आमतौर पर खिलाड़ी रहीं महिलाएं एक समय के बाद खेलों से विमुख हो जाती हैं और अपनी सेहत को नजरअंदाज करने लगती हैं; साथ ही उन्होंने लेखिकाओं को खेल जैसे अछूते विषयों पर भी सशक्तता से कलम चलाने के लिए प्रेरित किया।


साथ ही पूर्व में खिलाड़ी रह चुकी मंच से जुड़ी लेखिकाओं ने अपने खट्टे-मीठे संस्मरण, जीत-हार के अनुभव और विचार साझा किए। जिसमें सुजाता देशपांडे, सुनीता दुबे ने 'आंगन की मिट्टी से गुम होते खेल', माधुरी निगम व सुनीता दुबे ने 'ऐसा कोई प्रसंग जब मैं जीतकर हारी' पर, शैला अज्बे ने 'खेल सिर्फ अभ्यास नहीं एक अनुशासन है' और आशा गर्ग तथा प्रतिभा जोशी ने 'खेल पर लेखन आसान नहीं है उसके उदाहरण, महिलाओं के लिए चुनौतियां एवं सुझाव, अमिता मराठे ने खेल में जुनून और सहयोग तथा स्नेहा काले ने जीवन में 'खेल, खेल में क्या से क्या हो गया', सुमन गुप्ता ने खेल में आत्मविश्वास और प्राप्त प्रेरणा जैसे विषयों पर अपने उत्कृष्ट और प्रभावी विचार सबके बीच रखे।

खेल की खास गोष्ठी में मुख्य अतिथि भी प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी स्निग्धा खासगीवाला ने महिला और लेखन के इस शानदार त्रिवेणी संगम की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ने के लिए लगन, अनुशासन, सहनशक्ति और एकाग्रता बेहद जरूरी है; उन्होंने पुराने खिलाड़ियों को याद करते हुए उनसे किस प्रकार प्रेरणा ली, स्वयं के खेल से जुड़े संस्मरण, आने वाली आर्थिक बाधाओं को साझा किया। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि पारिवारिक सहयोग से ही महिलाएं अपनी सेहत और लेखन को सहेज सकती हैं क्योंकि खेल और लेखन दोनों ही विधाओं की चुनौतियों को लेखनी के माध्यम से ही सच्ची आवाज मिलती है। 


इस गोष्ठी की कुशल संयोजक अमर चड्ढा व अंजना चक्रपाणि मिश्र ने अतिथि स्वागत पुष्पगुच्छ व स्मृति चिन्ह भेंट कर किया।

अंजना सक्सेना के जीवंत संचालन में संपन्न हुई। इस गोष्ठी के सफल आयोजन के लिए अंत में, प्रीति दुबे ने सभी उपस्थित प्रबुद्ध जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस गोष्ठी में एक नई पहल के तहत सभी वामा सखियों ने म्यूजिकल चेयर रेस का आनंद लिया। खेल-खेल की ऊर्जा ने सहसचिव प्रतिभा जैन सहित उपस्थित सभी वामा सखियों को ऊर्जा से भर दिया।

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