नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नित्य योग शिविर के सातवें दिन योगाचार्य अमरपाल ने योग साधकों को मानव शरीर की आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक संरचना के विषय में विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि योग दर्शन के अनुसार मानव शरीर पांच कोशों—अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश तथा आनन्दमय कोश—से मिलकर बना है। इन पंचकोशों की समुचित समझ और संतुलन ही व्यक्ति के समग्र शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास का आधार है।
योगाचार्य अमरपाल ने बताया कि अन्नमय कोश मानव शरीर का स्थूल स्वरूप है, जो अन्न से निर्मित और पोषित होता है। अन्न पृथ्वी से उत्पन्न होता है और उसी के माध्यम से जीवन का संरक्षण एवं विकास संभव होता है। उन्होंने कहा कि शुद्ध एवं सात्विक आहार अन्नमय कोश को स्वस्थ एवं सशक्त बनाता है। उन्होंने आगे बताया कि प्राणमय कोश शरीर में प्रवाहित होने वाली जीवन ऊर्जा अर्थात प्राणशक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। विभिन्न प्राणायामों एवं योगाभ्यास के माध्यम से इस कोश को संतुलित रखा जा सकता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। मनोमय कोश के संबंध में उन्होंने कहा कि यह मन, विचारों और भावनाओं से संबंधित है। सकारात्मक चिंतन, ध्यान और योगाभ्यास के माध्यम से मनोमय कोश को शुद्ध एवं संतुलित रखा जा सकता है। इसके पश्चात उन्होंने विज्ञानमय कोश को बुद्धि, विवेक एवं ज्ञान का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर करने की क्षमता प्रदान करता है। योगाचार्य ने बताया कि पंचकोशों में सबसे सूक्ष्म और उच्चतम स्तर आनन्दमय कोश है, जो व्यक्ति को परम आनंद एवं ईश्वर के निकट होने का अनुभव कराता है। जब साधक योग और ध्यान के माध्यम से इस अवस्था को प्राप्त करता है, तब वह आत्मिक शांति और परम सुख का अनुभव करता है। योग सत्र के दौरान योगाचार्य अमरपाल ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ साधकों को विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया।
इस अवसर पर शीर्षासन, वकासन सहित अनेक उन्नत योगासनों का प्रदर्शन एवं अभ्यास कराया गया। साथ ही साधकों को नाड़ी शोधन प्राणायाम, चंद्रभेदी प्राणायाम, शीतली प्राणायाम तथा भ्रामरी प्राणायाम का नियमित अभ्यास कराया गया। उन्होंने इन प्राणायामों के स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि इनके नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव कम होता है, मन एकाग्र होता है तथा शरीर और मन में संतुलन स्थापित होता है।
योग शिविर में उपस्थित साधकों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास में भाग लिया तथा योगाचार्य द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान योग एवं स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर योग विज्ञान विभाग के शिक्षक एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार त्यागी, डॉ. कमल शर्मा, अंजुम मलिक, अरुण सिसोदिया, विवेक कुमार सहित अनेक योग साधक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


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