नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। बिल्डर और शराब कारोबारी चिंटू उर्फ हितेंद्र ठाकुर को ब्लैकमेल करने के मामले में गिरफ्तार सागर निवासी रेशू चौधरी और हनी ट्रैप-1 की मुख्य आरोपी श्वेता जैन को लेकर कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान क्राइम ब्रांच ने अदालत को बताया कि दोनों महिलाओं से जुड़ा गिरोह सुनियोजित तरीके से लोगों को फंसाकर ब्लैकमेलिंग और वसूली का काम करता था।
जांच एजेंसी के अनुसार रेशू चौधरी और श्वेता जैन से कुल 9 मोबाइल फोन, एक स्पाई कैमरा, पावर बैंक, 32 जीबी का मेमोरी कार्ड और दो पेन ड्राइव जब्त किए गए हैं। वहीं अन्य आरोपियों के पास से भी मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। मामले की जांच के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें जुटी हुई हैं।
इस पूरे मामले में गिरफ्तार लेडी शराब तस्कर अलका दीक्षित,उसके सहयोगी लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित, हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा और जयदीप ने जमानत के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंगलवार को लाखन चौधरी की ओर से जमानत याचिका दायर की गई, लेकिन क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने इसका विरोध किया।
संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही...
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आरोपियों के पास से कई आपत्तिजनक सामग्री मिली है। जांच एजेंसी का कहना है कि इससे मामले का दायरा और बढ़ सकता है। वहीं अलका दीक्षित से पूछताछ के लिए पुलिस ने अतिरिक्त रिमांड भी मांगा है।
मोबाइल डेटा में कई लोगों के नाम आने की आशंका...
सूत्रों के मुताबिक जांच अब केवल फरियादी चिंटू ठाकुर तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने कई प्रभावशाली लोगों को भी अपने जाल में फंसाया हो सकता है।
जब्त मोबाइल फोन की जांच में रेशू, श्वेता, अलका और गिरफ्तार हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा के बीच कुछ संवेदनशील फोटो साझा किए जाने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा अन्य लोगों से जुड़ी सामग्री भी मिलने की बात सामने आ रही है, हालांकि पुलिस ने अभी किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
स्पाई कैमरे से रिकॉर्डिंग, मेमोरी कार्ड में सुरक्षित रखता था डेटा...
जांच में सामने आया है कि रेशू चौधरी के पास से मिला स्पाई कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण संभावित रूप से गोपनीय रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। पुलिस को 32 जीबी का मेमोरी कार्ड भी मिला है, जिसमें बड़ी मात्रा में डेटा होने की संभावना जताई जा रही है।.... तकनीकी विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि रिकॉर्ड की गई सामग्री को और किन डिवाइस या स्टोरेज माध्यमों में सुरक्षित रखा गया था अथवा कहीं हटाया तो नहीं गया।
पुलिस को आशंका है कि जब्त मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड में कई लोगों से जुड़े फोटो और वीडियो मौजूद हो सकते हैं। फिलहाल डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच जारी है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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