नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग द्वारा नित्य योग शिविर के चतुर्थ दिन योग आचार्य अमरपाल ने कहा—"योग साधकों को मोक्ष प्राप्ति का साधन है। अष्टांग योग महर्षि पतंजलि रचित योग सूत्र में अष्टांग योग के आठ अंग होते हैं। यह नियम आसन प्राणायाम, प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि जिसमें अष्टांग योग के आधार पर यम के पांच अंग होते हैं—अहिंसा, सत्य, अस्ते, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह नियम के भी पांच अंग होते हैं। सोच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान, आसान तीसरा अंग है; और प्राणायाम को चौथा अंग माना जाता है।"
बताया गया है जिनके द्वारा शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता प्राप्त होती है। प्रत्याहार के द्वारा इंद्रियों और मन पर संयम किया जाता है। धारणा, मन को एकाग्र करने के लिए ध्यान तेल की धार की तरह अनवरत रूप से एक ही केंद्र पर स्थापित होना है। समाधि जब पूर्ण रूप से साधक शून्य हो जाता है, वह समाधि की स्थिति को प्राप्त करता है। शिविर का शुभारंभ वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ प्रारंभ किया गया। योग अभ्यास में व्यायाम सूर्य नमस्कार त्रिकोणासन उष्ट्रासन ताड़ आसान, मंडूकासन, भुजंगासन, पवनमुक्त आसन, चक्रासन, धनुरासन, अर्धचक्रासन, अर्ध हलासन, गोमुख आसान, उष्ट्रासन कपालभाति, अनुलोम-विलोम आदि का अभ्यास कराया। इस अवसर प्रोफेसर सरोज कुमारी, डॉक्टर वैशाली पाटील, डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार, डॉ विवेक कुमार त्यागी, डॉक्टर कमल शर्मा, अंजू मलिक, राखी सिंह, अभिषेक कुमार, अरुण सिसोदिया, राकेश कुमार, अनुज बैसला, विवेक कुमार, पुष्पेंद्र कुमार, ज्योति सिंह, नंदिनी योग विज्ञान विभाग के सभी विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने सभी योग साधकों के आसान और प्राणायाम की मुद्रा को सही किया। बड़ी संख्या में योग साधक उपस्थित रहे।

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