- जानबूझकर भी क्यों अनजान बना बैठा है स्वास्थ्य विभाग
सलीम सिद्दीकी
नित्य संदेश, मेरठ। स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वालीं एएनएम, आंगनबाड़ी और आशा का एक ऐसा त्रिकोण खिंच चुका है, जिस पर स्वास्थ्य विभाग की लगभग सभी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने का दारोमदार है, ताकि नौहिहालों का बचपन खिलखिलाता रहे। इतनी बड़ी जिम्मेदारी उठाकर चल रहीं इन एएनएम, आंगनवाड़ी और आशाओं की फौज में से जब कुछ एक अपने मूल उद्देश्यों से भटक जाती हैं तब कई सरकारी योजनाएं भी पटरी से उतर जाती हैं।
घरेलू प्रसव के मामलों में जहां एएनएम अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए विभिन्न लाभार्थी परिवारों में सुरक्षित प्रसव के लिए पूरी काउंसलिंग करती हैं वहीं आंगनबाड़ी से लेकर आशा भी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं। जब कभी एएनएम, आंगनबाड़ी और आशा का 'त्रिकोण' अपनी जिम्मेदारियां से मुंह मोड़ता है तब आमजन की स्वास्थ्य विभाग के मूल उद्देश्यों से टकराव की स्थिति पैदा होती है। आइए उदाहरण के तौर पर कुछ समय पूर्व की उस घटना का जिक्र करते हैं जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरूरपुर के अंतर्गत एक घटना घटी थी। इस घटना ने पूरे स्वास्थ्य विभाग को हिला कर रख दिया था। इस सामुदायिक केंद्र पर तैनात एक एएनएम ने एक ब्यूटी पार्लर की आड़ में ही एक गर्भवती की डिलीवरी करा दी थी। इस केस में जच्चा बच्चा दोनों की मौत हो गई थी। हालांकि घटना कुछ वर्ष पुरानी है लेकिन समाचार में उदाहरण के तौर पर कोड करने लायक जरूर है। इसके अलावा अक्सर कुछ अनुभवहीन दाई (असुरक्षित प्रसव) द्वारा की जाने वाली डिलीवरी के दौरान भी जच्चा बच्चा की मौत की खबरें सुनने को मिलती रहती हैं। यहां हम मवाना क्षेत्र की एक और घटना कोड कर रहे हैं। यह घटना भी कुछ समय पुरानी है।
यहां एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एक झोलाछाप से डिलीवरी के दौरान महिला की नस कट जाने से जच्चा बच्चा दोनों की मौत हो गई थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 'एक कदम सुरक्षित मातृत्व की ओर' जैसे कार्यक्रम शुरू होने के बाद स्थिति में काफी हद तक बदलाव देखने को मिला। उधर दूसरी ओर बच्चों के स्वास्थ्य से लेकर गर्भवती महिलाओं की देखभाल तक के सरकारी दावों की मॉनिटरिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर के एनजीओ द्वारा की जाती रही है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इन एनजीओ से जुड़े कुछ वॉलिंटियर्स भी मॉनिटरिंग के मूल उद्देश्यों से कभी कभी भटक जाते हैं। उधर स्वास्थ्य एजेंसियों से जुड़े कुछ दूसरे सूत्रों के अनुसार घरेलू प्रसव का जो 'खेल' कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहा है, उस खेल में कुछ एएनएम के साथ साथ कुछ आंगनवाड़ियां और कुछ आशाएं भी सक्रिय हैं। मॉनिटरिंग के उद्देश्य से यूनिसेफ ने तो बाकायदा एचबीएनसी (होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर) जैसा महत्वपूर्ण कार्यक्रम तक लांच किया था।
इस कार्यक्रम में यूनिसेफ के हेल्थ वॉलिंटियर्स घर-घर जाकर यही चेक करते थे कि संबंधित आशा नवजात शिशु और मां की देखभाल सही ढंग से कर भी रही है या नहीं। कुल मिलाकर स्वास्थ्य विभाग से लेकर विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों ने अपने काम को किसी हद तक संतोषजनक ढंग से किया लेकिन कहीं न कहीं सरकार की 'सुरक्षित प्रसव' जैसी योजनाओं को पलीता लगाने का काम कुछ गिनी चुनी एएनएम से लेकर आंगनवाड़ियों और आशा बहनों ने किया जिस पर लगाम लगाना जरूरी है।

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