नित्य संदेश ब्यूरो
नई दिल्ली। उप पुलिस आयुक्त को पीड़िता रामप्यारी ने ज्ञापन देकर पुत्री की हत्या में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रामप्यारी का कहना है कि मेरी पुत्री ज्योति की हत्या दहेज को लेकर की गई। मांग की कि मृत्यु के मामले में दर्ज एफआईआर में उचित धाराएं जोड़ने, आरोपियों की गिरफ्तारी, बच्चों के बयान को संज्ञान में लेने, बच्चों से मिलने की अनुमति दिलाने एवं निष्पक्ष जांच की प्रार्थना पत्र में की है।
राम प्यारी ने बताया कि वह Block-E, A-45, Peera gari Relief Camp Delhi 110056 की निवासी है। मेरी पुत्री ज्योति (पत्नी राहुल) की मृत्यु 21/22 अप्रेल 2026 को उसके ससुराल (पता: H.No. 61-B, नांगलोई, दिल्ली) में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है, जिसके संबंध में थाना नांगलोई में FIR No. 0157/2026 दर्ज है। मेरी पुत्री का विवाह लगभग 8 वर्ष पूर्व राहुल के साथ हुआ था। विवाह के पश्चात से ही उसके पति एवं ससुराल पक्ष द्वारा लगातार दहेज की मांग को लेकर मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा। उसका पति नशे का आदी था तथा आए दिन उसके साथ मारपीट करता था। इस संबंध में मेरी पुत्री द्वारा पूर्व में महिला आयोग में लिखित शिकायतें भी दी गई थीं। इसके बावजूद ससुराल पक्ष द्वारा उसकी प्रताड़ना बंद नहीं की गई।
गत 21/22 अप्रेल 2026 की रात को मेरी पुत्री की मृत्यु हुई, जो पूर्णतः संदिग्ध है। हमें पूर्ण विश्वास है कि उसकी गला दबाकर हत्या की गई है, जिसमें उसके पति राहुल एवं उसके परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि घटना के समय मौजूद उसके छोटे-छोटे बच्चों ने स्वयं यह देखा है और पुलिस के समक्ष बयान दिया है कि "उनके पिता राहुल ने उनकी माँ का गला दबाकर हत्या की है।" यह अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रत्यक्ष साक्ष्य है इसके अतिरिक्त, वर्तमान में मुझे मेरे नाती नातिन (बच्चों) से मिलने नहीं दिया जा रहा है तथा जानबूझाकर मुझे उनसे दूर रखा जा रहा है। मुझे यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि बच्चों की दादी (पिता पक्ष) उनसे बार-बार मिलकर उन्हें समझाने/प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं, जिससे बच्चों के बयान को बदलने या गलत दिशा में प्रभावित करने की संभावना है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है और निष्पक्ष जांच को प्रभावित कर सकती है।
पीड़िता ने बताया कि वर्तमान में दर्ज एफआईआर में केवल हत्या (BNS 103 (1)) की धारा लगाई गई है, जबकि यह मामला स्पष्ट रूप से दहेज मृत्यु एवं क्रूरता का भी है। अतः यह मामला धारा 304 बी (दहेज मृत्यु), 498 ए (क्रूरता), 406 (दहेज संबंधी अपराध) एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत भी आता है।
मांग की गई किः
1. उक्त FIR में तत्काल धारा 3048, 498अ, 406 एवं अन्य उचित धाराएं जोड़ी जाएं।
2. घटना के प्रत्यक्षदर्शी बच्चों के बयानों को विधिक रूप से सुरक्षित कर, बिना किसी बाहरी दबाव के रिकॉर्ड किया जाए।
3. यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों पर किसी भी प्रकार का दबाव या प्रभाव न डाला जाए।
4. सभी आरोपियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई कर उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाए।
5. मामले की निष्पक्ष, गहन एवं वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जांच कराई जाए।
6. मुझे मेरे नाती/नातिन से तत्काल मिलने की अनुमति दिलाई जाए तथा उनसे मिलने में आ रही बाधाओं को समाप्त कराया जाए।
7. मेरी पुत्री के बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी अभिरक्षा मुझे प्रदान करने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए।


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