
सपना सी.पी. साहू
नित्य संदेश, इंदौर। साहित्य और सामाजिक जागरूकता को समर्पित शहर की प्रतिष्ठित संस्था 'वामा साहित्य मंच' द्वारा 'नशा निरोधक दिवस' के उपलक्ष्य में विशेष मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का मुख्य विषय 'नशा करेगा नाश' रखा गया, जिसके माध्यम से समाज को व्यसन मुक्त बनाने का पुरजोर संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रुति शर्मा द्वारा प्रस्तुत सुरमयी सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। वामा की अध्यक्ष ज्योति जैन ने शब्द-पुष्पों से अतिथियों का स्वागत किया और संस्था का परिचय दिया। उन्होंने नशे की तुलना एक ऐसे 'धीमे विष' से की, जो तन और मन को धीरे-धीरे समाप्त कर देता है। साहित्यकारों को "शब्दों और स्वाध्याय का नशा" करने की सलाह देते हुए उन्होंने एक स्लोगन के माध्यम से अपनी बात रखी— "नशे से जो तौबा कर लेता, परिवार आज यूं ना बिखरता।"
रचनात्मक प्रस्तुतियों से जन-जागरूकता
आयोजन का मुख्य आकर्षण वामा सखियों द्वारा स्वरचित प्रेरक स्लोगन (नारे) लिखकर उनका वाचन करना रहा, जिसका उद्देश्य राष्ट्र तक नशा मुक्ति का सशक्त संदेश पहुँचाना था। साथ ही, नीरजा जैन, अनिता जोशी, सुनीता दुबे और उषा गुप्ता ने 'सुबह का तारा' नामक जीवंत नाटिका की प्रस्तुति देकर नशा मुक्ति के मानवीय पक्ष को उजागर किया।
विशेष अतिथि की राय: बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. निखिल ओझा (व्यसन मुक्ति विशेषज्ञ एवं संस्थापक, नवचेतना नशा मुक्ति केंद्र) थे। कार्यक्रम संयोजक मधु टाक, तनुजा शर्मा और सचिव स्मृति आदित्य ने स्मृति चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया। डॉ. ओझा ने बताया कि नशे की समस्या को मानसिक रोग की श्रेणी में काफी बाद में रखा गया, जबकि यह समाज को शारीरिक और आर्थिक रूप से खोखला कर रही है।
उन्होंने जोर देकर कहा, "नशे का उपचार कठिन और महंगा है, इसलिए हमारा पूरा ध्यान रोकथाम और जागरूकता पर होना चाहिए।" उन्होंने मोबाइल की लत को भी नशे के समान ही घातक बताया और स्कूली पाठ्यक्रम में नशा मुक्ति की जानकारी शामिल करने की आवश्यकता जताई। डॉ. ओझा ने वामा की लेखिकाओं के स्लोगनों को 'अचूक' बताते हुए इन्हें पुस्तकों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने की अपील की।
सम्मान और संकल्प
इस अवसर पर मंच द्वारा दो लेखिकाओं— डॉ. गरिमा दुबे व अर्चना मण्डलोई तथा दो पत्रकारों— मुकेश तिवारी व डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन शिरीन भावसार ने किया। सचिव स्मृति आदित्य ने एक सुखी और सुरक्षित परिवेश के निर्माण के लिए सभी से नशा मुक्ति के संदेश को प्रसारित करने का आह्वान किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित प्रबुद्ध लेखिकाओं ने समाज को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया। अंत में आभार प्रदर्शन वाणी जोशी द्वारा किया गया।


No comments:
Post a Comment