नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। भारत के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी और लगभग 15 प्रतिशत पशु हमारे देश में रहते हैं, जबकि देश का भौगोलिक क्षेत्रफल विश्व के क्षेत्रफल का केवल 2.4 प्रतिशत है। वन और चारागाह मैदान केवल 1.5 प्रतिशत और पानी के संसाधन केवल 4.2 प्रतिशत हैं। देश में चारे के मुख्य स्रोत फसल अवशेष, उगाया गया हरित चारा और वनों, स्थायी चारागाह मैदानों व चराई की जमीनों आदि से मिलने वाला चारा है।
क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के चीफ एग्ज़िक्यूटिव ऑफिसर बीज सत्येंदर सिंह ने कहा भारत में पशुधन का सेक्टर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आ गया है। हमारी चुनौती केवल दूध उत्पादन को लेकर नहीं है, बल्कि हरित चारे की क्वालिटी और उपलब्धता बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए हमने क्रिस्टल में बीजों का विकास करने में एक दशक से अधिक समय लगाया है। हमारी कोशिशों का सबसे बेहतर उत्पाद ‘‘डेयरी ग्रीन’’ है। यह एक ऐसा बीज है, जो प्रति एकड़ ज्यादा पोषण देता है, जिससे डेयरी किसान पशु आहार के कम खर्च में अधिक दूध का उत्पादन करने में समर्थ बनते हैं। खरीफ 2026 के लिए हमारे बढ़े हुए पोर्टफोलियो से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को हर स्थिति से निपटने के लिए सही टूल्स प्राप्त होंगे।’’
क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के चीफ एग्ज़िक्यूटिव ऑफिसर, बीज, सत्येंदर सिंह ने कहा हमें उम्मीद है कि हमारा खरीफ 2026 चारा बीज कार्यक्रम खेतों में बहुत उच्च पैदावार देगा। डेयरी किसानों के बीच हरित चारे की गुणवत्ता और दूध की पैदावार के संबंध की बढ़ती जागरुकता के साथ वैज्ञानिक रूप से विकसित चारा बीज की मांग बहुत अधिक बढ़ चुकी है। भारत में पशुधन के सेक्टर का विकास करने में आने वाली मुख्य बाधा अच्छी घास और चारे की लगातार बनी रहने वाली कमी है। पशुधन आहार के लिए ऐसे स्रोतों पर निर्भर है, जो सस्टेनेबल नहीं हैं। उन्हें ज्यादातर पोषण फसल के अवशेषों और जोती गई एवं बीहड़ जमीनों तथा आम चराई की जमीनों से मिलने वाले चारे से प्राप्त होता है। इसलिए दुधारू पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका में मदद करने के लिए उन्हें चारा उपलब्ध कराने का एक योजनाबद्ध, वैज्ञानिक और आर्थिक रूप से व्यवहारिक उपाय किया जाना बहुत जरूरी है।
मुख्य राज्यः भारत में चारा उत्पादन के केंद्र: क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन का 2026 चारा अभियान चार महत्वपूर्ण राज्यों, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान पर केंद्रित है, जो भारत के चारा उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान देते हैं। इन राज्यों में ज्वार, मक्का, बाजरा, बरसीम और लूसर्न जैसी फसलें सबसे अधिक उगाई जाती हैं, जो भारत में पशुओं की बड़ी और बढ़ती हुई आबादी के पोषण के लिए आवश्यक हैं। भारत में पशुओं की बड़ी और बढ़ती हुई आबादी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश मुख्य भूमिका निभाता है, क्योंकि यहाँ पर पशु बहुत अधिक संख्या में है और यहाँ ज्वार एवं बाजरा की खेती की जाती है, जिनका उपयोग चारे एवं अनाज, दोनों उद्देश्यों के लिए होता है।
क्रिस्टल के फ्लैगशिप चारा बीज, डेयरी ग्रीन का जबरदस्त जमीनी प्रभाव: क्रिस्टल के प्रमुख सिंगल-कट हरित चारा हाईब्रिड, डेयरी ग्रीन को उच्च पैदावार देने वाले डेयरी पशुओं को पोषण देने के उद्देश्य से बनाया गया है। यह पौधों की आधुनिक प्रजनन तकनीक से विकसित किया गया है। इसलिए डेयरी ग्रीन लगातार उच्च बायोमास पैदावार, ज्यादा मात्रा में प्रोटीन और बेहतरीन स्वाद प्रदान करता है, जिसके कारण यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डेयरी किसानों का पसंदीदा पशु आहार है।
क्रिस्टल खरीफ 2026 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को संपूर्ण चारा बीज उपलब्ध कराएगा रू क्रिस्टल डेयरी ग्रीन के अलावा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को अगली पीढ़ी के चारा बीज की पूरी श्रृंखला पेश करेगा, जो भिन्न-भिन्न कृषि जलवायु की जरूरतों को पूरा करेगी। इनमें उच्च पैदावार देने वाला ज्वार-सूडान हाईब्रिड एसएक्स17 शामिल है जिसका तना मजबूत होता है, पकने में मध्यम समय लगता है और दोबारा उगने की क्षमता अच्छी होती है। वहीं स्टार ज्यादा तेजी से पकने वाला ज्वार है, जो हरित चारे और अनाज, दोनों के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
फसल क्षेत्र में प्रमुख कंपनी के रूप में क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन भारत सरकार के राष्ट्रीय पशुधन मिशन में अपना सक्रिय योगदान दे रही है। इसके बीज एन.एल.एम के लक्ष्यों के अनुरूप हैं और प्रति एकड़ चारे की उत्पादकता बढ़ाते हैं। ये बीज पशु आहार का पोषण बढ़ाते हैं तथा अस्थायी एवं सामान्य चराई भूमि पर निर्भरता कम करते हैं। कंपनी की हरित चारा क्रांति का उद्देश्य राष्ट्रीय नीति की प्राथमिकताओं से मेल खाता है, जो कम होते एवं प्राकृतिक अवशेषों पर आधारित पशु आहार की बजाय वैज्ञानिक रूप से विकसित उच्च गुणवत्ता के हरित चारे पर जोर देती है। फसल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी के रूप में क्रिस्टल की फील्ड टीमें जमीनी स्तर पर परिवर्तन लाने के उद्देश्य से लगातार किसानों और किसान उत्पादक संगठनों के संपर्क में रहती हैं।

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