आज हमारी भारतीय संस्कृति एवं समाज में एक भयावह स्थिति बनी हुई है। हर व्यक्ति विचलित है कि आखिर, हमारी संस्कृति एवं परिवारों की नींव इतनी हिली हुई क्यों है? क्यों बढ़ रहे हैं रिश्तों में फासले? क्यों बढ़ रही है दूरियां? क्यों बढ़ रहे हैं आज इतने तलाक?क्या हमने सोचा है कभी इस बारे में?
बच्चों की गलत महत्वाकांक्षाएं ,"स्व"और "स्वार्थ" की अभिलाषा और परिभाषा रिश्तों में बढ़ती दूरियों के बहुत बड़े कारण हैं। आज के माता-पिता बच्चों को उच्च शिक्षा, हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का संकल्प, वित्तीय सुविधाएं यह सब कुछ तो दे देते हैं, मगर देना भूल जाते हैं "संस्कार".... जो हमारे खुशहाल जीवन की नींव है, जड़ है, आधारशिला है। बच्चों को "संस्कारों से सिंचित" कीजिए।सहनशीलता की घुट्टी पिलाईए। यह कहकर नज़अंदाज ना कीजिए क्या करें जमाना ही ऐसा है?
माता-पिता का बेटियों के ससुराल में दखल, बेटियों की हर छोटी से छोटी बात का माता-पिता को कहना, लड़के एवं लड़कियों में अहम का टकराना ऐसे कई कारण है तलाक के। हर रिश्ता संवरने के लिए कुछ वक्त चाहता है। चाहे कोई भी रिश्ता हो एक-दूसरे से निभाने की क्षमता ही मज़बूत रिश्ते की नींव है। आजकल के बच्चे यह कहकर दूरियां बना लेते हैं कि हमारे बीच "अंडरस्टैंडिंग" नहीं है। क्या इतने थोड़े से वक्त में हमने एक-दूजे को जान लिया, समझ लिया। हर किसी में खूबियां और खामियां दोनों ही होती है।
आजकल हम देखते हैं कि कितनी सगाई, कितनी शादियां टूट रही है। हर रिश्ता बिखर रहा है। समाज की यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। हमारे विवाह योग्य बच्चों की उम्र बढ़ती जा रही है। क्योंकि किसी को किसी से एडजस्ट नहीं करना है। हमारे बच्चों को हम "समझदारी+सहनशीलता+संस्कार" इन सब का पाठ पढ़ाएं। बेटियों को परिवार, रिश्तेदारों के साथ विनम्र बर्ताव रखना सिखाएं।बेटों को हर नारी का सम्मान करना सिखाए। इस प्रकार हर व्यक्ति अपने रिश्तों की मर्यादा निभाने की दृढ़ता रखें, तब हमारे रिश्तें नया खूबसूरत मोड़ लेंगे और इन्हीं खूबसूरत रिश्तों के निर्माण से परिवार सुखी, स्वर्ग से सुंदर बन सकेंगे। एक मज़बूत समाज का निर्माण होगा। रिश्तों में दूरियां मिटेगी।
• प्रीति धीरज जैन "धीरप्रीत"
इंदौर, मध्यप्रदेश


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