नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। बागपत रोड स्थित विद्या यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ फार्मेसी में बुधवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ हुआ। ‘रिसेंट ट्रेंड ऑफ आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस फॉर सस्टेनेबल स्ट्रेटेजिक हेल्थ सिस्टम्सःबिल्डिंग रेजिलिएंट नेशन’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस को डीआरडीओ ने प्रायोजित किया है। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में डीआरडीओ की पूर्व डीजी डॉ.शशि बाला सिंह मौजूद रहीं।
सम्मेलन में पहले दिन देशभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों एवं फार्मा उद्योग विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान किया गया जहां आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस के माध्यम से रणनीतिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्र निर्माण में नवाचारों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन कुल 25 पोस्टर और 10 ओरल प्रेजेंटेशन हुए। साथ ही दो उत्पादों को लांच करने के साथ स्मारिका का विमोचन हुआ। विद्या यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ फार्मेसी में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, के उपयोग से एक मजबूत, सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु नए आयामों को तलाशना रहा। इसके तहत विभिन्न तकनीकी सत्र, शोध-पत्र प्रस्तुतियां, पैनल चर्चाएं एवं विशेषज्ञ व्याख्यान हुआ। पहले दिन उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं विद्यागान से हुआ। सभी अतिथियों का स्वागत फार्मेसी विभाग के डीन एवं कॉन्फ्रेंस संयोजक डॉ.प्रेम शंकर मिश्रा ने हरित पौध, शॉल एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर किया।
बीज भाषण में पूर्व महानिदेशक, डीआरडीओ डॉ.शशि बाला सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस सतत रणनीतिक सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से एक सशक्त, आत्मनिर्भर और रेजिलिएंट राष्ट्र का निर्माण संभव है। यह भविष्य की आवश्यक तकनीक है। उन्होंने बताया कि एजीआई के माध्यम से रक्षा तंत्र को अधिक सक्षम, त्वरित और सटीक बनाया जा सकता है, जिससे संभावित खतरों का समय रहते आकलन और समाधान संभव हो पाता है। वहीं मेडिकल डिवाइसेज उद्योग के सीनियर जनरल मैनेजर एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. नीरज शर्मा ने कहा कि यह तकनीक रोगों के प्रारंभिक निदान, दवा विकास तथा स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने जोर दिया कि सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए उन्नत तकनीकों का समुचित उपयोग आवश्यक है। गेस्ट ऑफ ऑनर एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में कैडिला फार्मा के हेड डॉ.प्रमोद कुमार राजपूत ने युवाओं और शोधकर्ताओं को नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि एक सशक्त और लचीले राष्ट्र के निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस मौके पर कुलाधिपति प्रदीप कुमार जैन ने इस कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन आधुनिक तकनीक और शोध को नई दिशा देगा। एजीआई के माध्यम से राष्ट्र की सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाया जा सकता है। ऐसे आयोजन नवाचार को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे। वहीं प्रो-कुलाधिपति विशाल जैन ने संदेश में कहा कि विद्या यूनिवर्सिटी निरंतर शिक्षा, शोध और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित कर रही है। यह सम्मेलन छात्रों और शोधकर्ताओं को नवीन विचारों के आदान-प्रदान का मंच प्रदान करेगा तथा एजीआई के माध्यम से सतत विकास और राष्ट्रीय प्रगति को नई गति देगा। इसके सफल आयोजन के लिए सभी को शुभकामनाएं दी। कुलपति डॉ. हिरेन दोशी ने कहा कि एजीआई भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक है, जो स्वास्थ्य और सुरक्षा क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है। कॉन्फ्रेंस की सह संयोजित डॉ.नेहा दोशी ने सभी का आभार व्यक्त किया। सभी अतिथियों ने फार्मेसी विभाग की बनाई नए उत्पाद वी-शील्ड हर्बल हैंडवॉश एवं वी-दंतमंजन को लांच किया। साथ ही कॉन्फ्रेंस स्मारिका का विमोचन भी किया।
इसके बाद तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया जिसमें कुल 25 पोस्टर और 10 ओरल प्रस्तुतिकरण हुआ। इसमें एनआईबी की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.गौरी मिश्रा, जामिया हमदर्द विवि की प्रोफेसर डॉ.मायमूना अख्तर, पेंटेंट एवं डिजाइन, भारत सरकार के पूर्व संयुक्त नियंत्रक डॉ.सुमन श्रेय सिंह आदि ने ज्ञानवर्धक प्रस्तुतिकरण दी। बतादे कि विद्या यूनिवर्सिटी का फार्मेसी विभाग सम्मेलन के माध्यम से अकादमिक एवं औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने तथा शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मौके पर रजिस्ट्रार विजय कुमार दुबे, सभी कॉलेज के डीन, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष के साथ बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी का योगदान रहा।


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