नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान ने आत्महत्या रोकथाम और प्रारंभिक लक्षणों पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया। यह जागरूकता सत्र न्यायमूर्ति राजेश चंद्र, निदेशक (इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति) और विधि संकाय की कार्यवाहक डीन, प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। यह सत्र उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्यरत विश्वविद्यालय टास्क फोर्स द्वारा छात्रों में आत्महत्या की प्रवृत्ति की रोकथाम के लिए आयोजित किया गया था।
सुभारती विधि महाविद्यालय की कल्याण अधिकारी डॉ. सारिका त्यागी द्वारा सुभारती विश्वविद्यालय के मनोचिकित्सा विभाग के सहयोग से संचालित किया गया था। कार्यक्रम की पहली वक्ता डॉ. सीमा शर्मा ने प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बढ़ती चिंताओं और शीघ्र पहचान एवं समय पर हस्तक्षेप के महत्व के बारे में शिक्षित करने के उद्देश्य से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आत्महत्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है जो व्यक्तियों, परिवारों और समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आत्महत्या वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से युवाओं में, मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। उन्होंने आत्महत्या के व्यक्ति और उनके परिवारों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के प्रावधानों पर भी चर्चा की और छात्रों को अपने मित्रों और अन्य लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के लिए उपाय करने के लिए प्रोत्साहित किया। दूसरे वक्ता डॉ. अंतुल त्यागी ने आत्महत्या की प्रवृत्ति के लिए जिम्मेदार कारकों के बारे में बताया। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे दूसरों के साथ विषाक्त संबंध, दोस्तों या माता-पिता का दबाव और कुछ अन्य कारक भी। यह आप पर निर्भर करता है कि आप इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं, क्योंकि जीवन बहुत अनमोल है और हमें अपना जीवन दूसरों के लिए बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपनी समस्याओं से जूझना नहीं चाहिए, बल्कि दूसरों के लिए भी काम करना चाहिए। यह सत्र न केवल आपको जागरूक करने के लिए आयोजित किया गया है, बल्कि समाज को जागरूक करना आपका कर्तव्य भी है। कार्यक्रम के समन्वयक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ सत्र समाप्त हुआ। आत्महत्या के कारणों पर चर्चा की गई है और साथ ही ऐसे विचारों से छुटकारा पाने के तरीकों पर भी बात की गई।
इस जागरूकता सत्र के दौरान प्रो. (डॉ.) प्रेम चंद्र, प्रो. (डॉ.) टी.एन. प्रसाद, डॉ. आफरीन अलमास, शालिनी गोयल, सोनल जैन, अरशद आलम, शिवानी, अनुराग चौधरी, आशुतोष देशवाल, मुस्कान और हर्षित आदि संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।


No comments:
Post a Comment