Breaking

Your Ads Here

Wednesday, April 29, 2026

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता मानव क्षमता निर्माण का भी आधार बने : कुँवर शेखर विजेंद्र

नित्य संदेश ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के अवसर पर भारत मंडपम में आयोजित सेक्टोरल राउंड टेबल में अपने विचार व्यक्त करते हुए शोभित विश्वविधालय के कुलाधिपति एवम् एसोचैम राष्ट्रीय शिक्षा परिषद के अध्यक्ष कुँवर शेखर विजेंद्र ने कहा कि राष्ट्रों के बीच सबसे मजबूत समझौते केवल इस आधार पर याद नहीं रखे जाते कि उन्होंने व्यापार को कितना उदार बनाया, बल्कि इस आधार पर कि उन्होंने मानव क्षमता निर्माण में कितना योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि व्यापार समझौतों का मूल्यांकन सामान्यतः शुल्क, बाज़ार पहुँच और आर्थिक लाभ तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि किसी भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते की वास्तविक शक्ति तब सामने आती है जब वह ज्ञान, संस्थागत विश्वास और मानव संसाधन के सुविचारित आदान-प्रदान को दिशा देता है। उन्होंने कहा कि भारत अपने विशाल जनसांख्यिकीय आधार, व्यापक उच्च शिक्षा तंत्र और संस्थागत विस्तार के साथ एक बड़ी शक्ति है, जबकि न्यूज़ीलैंड अनुप्रयुक्त शिक्षा, व्यावसायिक गुणवत्ता, सतत कृषि और शोध आधारित व्यावहारिक प्रणालियों का विश्वसनीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। दोनों देशों की ये विशेषताएँ परस्पर पूरक हैं और यही इस समझौते की सबसे बड़ी संभावना है। 



कुँवर शेखर विजेंद्र ने सुझाव दिया कि शिक्षा और कौशल विकास को व्यापारिक ढाँचे के केंद्र में रखा जाना चाहिए। इसके लिए संयुक्त डिग्री एवं डिप्लोमा कार्यक्रम, अकादमिक क्रेडिट व्यवस्था, योग्यता की पारस्परिक मान्यता, क्षेत्र आधारित कौशल साझेदारी तथा डिजिटल प्रमाणन प्रणाली जैसे कदम आवश्यक होंगे। उन्होंने कहा कि कृषि, डेयरी विज्ञान, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सेवाएँ और पर्यावरणीय प्रणालियाँ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच व्यावहारिक सहयोग नए परिणाम दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते में योग और आयुष को स्थान मिलना विशेष महत्व रखता है। यह इस बात की स्वीकृति है कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ आज वैश्विक स्वास्थ्य, निवारक चिकित्सा और समेकित स्वास्थ्य चिंतन में उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं।


कुँवर शेखर विजेंद्र ने इस महत्वपूर्ण समझौते को उद्देश्यपूर्ण स्पष्टता और उल्लेखनीय गति के साथ अंतिम रूप देने के लिए भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल तथा न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं कृषि मंत्री टॉड मैक्ले के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समझौते मेज़ों पर हस्ताक्षरित होते हैं, पर उनका वास्तविक मूल्य कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेतों और अस्पतालों में निर्मित होता है।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here