नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ - कैंसर के इलाज के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है और अब इलाज पहले से अधिक सटीक और सुरक्षित होता जा रहा है। इसी दिशा में “एडैप्टिव रेडियोथेरेपी” एक उन्नत तकनीक के रूप में सामने आई है, जो मरीज के शरीर में हो रहे बदलावों के अनुसार इलाज को लगातार अपडेट करती है। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि यह तकनीक कैंसर इलाज को अधिक प्रभावी और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डॉ. अग्रवाल के अनुसार, पारंपरिक रेडियोथेरेपी में एक तय योजना के अनुसार इलाज किया जाता है, जबकि एडैप्टिव रेडियोथेरेपी में ट्यूमर के आकार, उसकी स्थिति और आसपास के अंगों में होने वाले रोजाना बदलावों को ध्यान में रखते हुए इलाज में बदलाव किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, फेफड़ों का ट्यूमर सांस लेने के साथ थोड़ा हिल सकता है, जबकि पेट के ट्यूमर की स्थिति पाचन के कारण बदल सकती है। इस तकनीक में इमेजिंग और एडवांस प्लानिंग टूल्स की मदद से हर बार सटीक तरीके से रेडिएशन दिया जाता है। उन्होंने बताया कि EDGE 4.1 और HyperArc जैसी आधुनिक तकनीकें इस प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाती हैं। इन सिस्टम्स में रेडिएशन किरणों को अलग-अलग एंगल से ट्यूमर पर फोकस किया जाता है, जिससे पूरा असर कैंसर वाले हिस्से पर होता है और आसपास के स्वस्थ अंगों को कम नुकसान पहुंचता है। यह तकनीक खासतौर पर जटिल और कठिन जगहों पर स्थित ट्यूमर के इलाज में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि इस तकनीक से मरीजों को कई फायदे मिल रहे हैं, जिनमें अधिक सटीक इलाज, स्वस्थ अंगों की बेहतर सुरक्षा, कुछ मामलों में कम सिटिंग में इलाज पूरा होना और कम समय में उपचार शामिल हैं। इससे मरीजों को सुविधा के साथ बेहतर अनुभव भी मिलता है। उन्होंने बताया कि एडैप्टिव रेडियोथेरेपी का उपयोग ब्रेन ट्यूमर, सिर और गले के कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, लीवर और पैंक्रियास के कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, महिलाओं से जुड़े कैंसर जैसे सर्वाइकल और यूटेरस कैंसर, तथा रीढ़ और हड्डियों के ट्यूमर सहित कई प्रकार के कैंसर में किया जा रहा है। इसके अलावा सीमित मेटास्टेटिक बीमारी के मामलों में भी इसका उपयोग किया जा रहा है।
डॉ. अग्रवाल के अनुसार, इस तकनीक का उद्देश्य इलाज को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना है। इससे ट्यूमर पर बेहतर नियंत्रण मिलता है और साइड इफेक्ट्स कम होते हैं। मरीज इलाज को बेहतर तरीके से सहन कर पाते हैं और कई मामलों में उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कैंसर का इलाज एक जैसा नहीं रह गया है, बल्कि हर मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जा रहा है। एडैप्टिव रेडियोथेरेपी इसी पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह की तकनीकें कैंसर इलाज को और अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बनाएंगी, जिससे मरीजों को बेहतर परिणाम मिल सकेंगे।

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