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Tuesday, April 7, 2026

देश-विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों ने सम्मेलन में रखे विचार

 


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। The three-day national conference on "the 37th ALL INDIA CONGRESS OF ZOOLOGY AND INTERNATIONAL CONFERENCE ON" advances in  scientific research for the health and well-being of man & his livestock: nutritional security and sustainable future"- 2026 उत्सव" पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 07-09 अप्रैल 2026 को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में शुरू किया गया।। यह कार्यक्रम सीसीएसयू के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा Zoological society of India के सहयोग से संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया और अपने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।

संगोष्ठी में जंतु विज्ञान एवं जीव विज्ञान के क्षेत्र में उभरते रुझानों और नवाचारों की खोज के उद्देश्य से प्रतिष्ठित विद्वानों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं तथा छात्रों को एक साझा मंच पर एकत्रित किया गया। यह आयोजन ज्ञान-विनिमय, नवाचार और शोध सहयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। कुलपति एवं सम्मेलन की मुख्य संरक्षक प्रो. संगीता शुक्ला के कुशल मार्गदर्शन और सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप सत्र का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि प्रो. आर.सी. सोबती, जेडएसआई के अध्यक्ष प्रो. बी.एन. पांडेय, डीन साइंस प्रो. हरे कृष्णा, डायरेक्टर रिसर्च प्रो. बीरपाल सिंह (सीसीएसयू विश्वविद्यालय) तथा जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश कुमार राय की गरिमामयी उपस्थिति में मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना के साथ संपन्न हुई। इस पावन एवं प्रेरणादायी आरंभ ने पूरे सम्मेलन को एक सकारात्मक दिशा प्रदान की तथा ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रति सभी प्रतिभागियों को प्रेरित किया। सम्मेलन के आयोजन संयोजक प्रो. बिन्दु शर्मा ने  गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा सम्मेलन के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों पर प्रकाश डाला।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. आर.सी. सोबती ने अपने प्लेनरी व्याख्यान में “महामारी स्वरूप एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से मुकाबला करने में बायोटेक्नोलॉजी की भूमिका का विश्लेषण” विषय पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी किस प्रकार दवाओं के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सम्मेलन के दौरान कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में नवीन शोध प्रस्तुत किए। प्रोफेसर रीता सिंह ने “महिलाओं में पीसीओएस के प्रबंधन की चुनौतियाँ और चिंताएँ” विषय पर अपने विचार रखते हुए इस समस्या के बढ़ते प्रभाव और उसके समाधान पर प्रकाश डाला। प्रो. डॉ. पापिया मंडल ने “नगरपालिका ठोस अपशिष्ट कंपोस्ट का चरित्रांकन और परिपत्र अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका” विषय पर व्याख्यान देते हुए कचरा प्रबंधन के सतत मॉडल पर जोर दिया। डॉ. रजत भार्गव ने “विलुप्ति को रोकना या निर्धारित करना: भारत में फिन्स और वीवर पक्षियों (Ploceus megarhynchus) का केस स्टडी” प्रस्तुत किया, जिसमें जैव विविधता संरक्षण की जटिलताओं को रेखांकित किया गया।


डॉ. सुनयना ने “एआई और रिमोट सेंसिंग के माध्यम से पर्यावरणीय प्रणाली की निगरानी” पर प्रकाश डालते हुए तकनीकी प्रगति के महत्व को बताया। प्रो. राकेश पांडेय ने “C. elegans मॉडल प्रणाली का उपयोग कर फाइटोमॉलिक्यूल्स का फार्मास्यूटिकल एवं न्यूट्रास्यूटिकल मूल्यांकन” विषय पर अपने शोध साझा किए। डॉ. ए.के. सिंह ने “जलीय आक्रमण: मत्स्य पालन और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता के लिए खतरा” विषय पर चर्चा करते हुए इसके प्रभाव और नियंत्रण उपायों पर जोर दिया।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रो. शोकूफेह शम्सी (ऑनलाइन) ने “वन हेल्थ फ्रेमवर्क में खाद्य जनित परजीवियों का अदृश्य जोखिम” विषय पर व्याख्यान दिया, जिसमें मानव स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के बीच संबंध को स्पष्ट किया गया।सम्मेलन ने वैज्ञानिक समुदाय को एक साझा मंच प्रदान किया, जहाँ नवीन शोध, विचारों और तकनीकों का आदान-प्रदान हुआ। यह आयोजन पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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