सलीम सिद्दीकी
नित्य संदेश, मेरठ। शरीयती उसूलों में हर मसले का हल है। समाज में शांति की स्थापना से लेकर निजी मसले मसाइल तक इन शरीयती कायदे कानूनों से हल किए जा सकते हैं।
यह कहना है दारुल क़ज़ा (मेरठ) के संचालक मुफ्ती हस्सान कासमी का। वह सीपीएस (सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी) के बैनर तले आयोजित उलेमा कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। दिल्ली के लीला एंबिएंस कन्वेंशन हॉल में आयोजित इस उलेमा कॉन्फ्रेंस में इस्लामी मुद्दों पर फोकस करने वाले मेरठ के प्रखर वक्ता मुफ्ती हस्सान कासमी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
इस दौरान उन्होंने अंतरधार्मिक संवाद के द्वारा विभिन्न धर्मों और आध्यात्मिक विश्वासों वाले लोगों के बीच एक सकारात्मक, सहयोगात्मक और रचनात्मक संवाद पेश किया। मुफ्ती हस्सान कासमी ने कहा कि जब तक आपसी समझ, सम्मान, विश्वास और सामाजिक न्याय को बढ़ावा नहीं मिलेगा तब तक समाज में संघर्षों को कम करके शांति स्थापित करना एक चुनौती है।

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