एडवोकेट शाहीन परवेज
नित्य संदेश। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन मेहनतकश महिलाओं के संघर्ष और सम्मान को याद करने का दिन है, जो अपनी मेहनत, सब्र और हिम्मत से परिवार, समाज और देश की बुनियाद को मज़बूत बनाती हैं। खेतों में मेहनत करने वाली किसान महिलाएँ, ईंट-भट्ठों पर काम करने वाली मज़दूर बहनें, घरों में काम करके अपने बच्चों का भविष्य सँवारने वाली माताएँ — ये सब अपने पसीने से इस देश की असली ताक़त बनती हैं।
हक़ीक़त यह है कि दुनिया भर में महिलाओं की मेहनत के बावजूद आज भी उन्हें वह मुकम्मल इज़्ज़त, हिफ़ाज़त और बराबरी के मौक़े नहीं मिल पाए हैं जिनकी वे हक़दार हैं। इसलिए ज़रूरी है कि समाज महिलाओं की तालीम, हिफ़ाज़त और इज़्ज़त को और मज़बूत करे। साथ ही मैं अपनी बहनों से एक मोहब्बत भरा और समझदारी का पैग़ाम भी देना चाहती हूँ। औरत की इज़्ज़त और उसकी साख समाज में बहुत बड़ी अमानत होती है। अपने हक़ और इंसाफ़ के लिए आवाज़ उठाना हर औरत का हक़ है, लेकिन किसी बेगुनाह पर झूठा इल्ज़ाम लगाना या क़ानून का ग़लत इस्तेमाल करना न सिर्फ़ इंसाफ़ के ख़िलाफ़ है बल्कि पूरे समाज और परिवार के लिए भी नुक़सानदेह होता है। औरत केवल एक इंसान नहीं, बल्कि एक पूरे घर की बुनियाद होती है। वही माँ बनकर परवरिश करती है, बहन बनकर मोहब्बत देती है, बेटी बनकर उम्मीद जगाती है और बीवी बनकर साथ निभाती है। इसलिए औरत की असली ताक़त उसकी इज़्ज़त, उसकी समझदारी और उसका किरदार होता है।
इस महिला दिवस पर आइए हम सब यह अहद करें कि मेहनतकश महिलाओं की इज़्ज़त बढ़ाएँगे, उनके हक़ की हिफ़ाज़त करेंगे और अपनी गरिमा, सच्चाई और समझदारी के साथ समाज को बेहतर बनाने में अपना किरदार अदा करेंगे। सभी मेहनतकश महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की दिली मुबारकबाद।

No comments:
Post a Comment