नित्य संदेश ब्यूरो
नई दिल्ली: अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर (SoA) और सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च एंड डिज़ाइन (CPRD) ने ‘व्यावसायिक अभ्यास में परिवर्तन के लिए वास्तुकला शिक्षा में स्थिरता का एकीकरण’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन मैग्नोलिया हॉल, इंडिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली में किया। इस कार्यक्रम में शिक्षकों, नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और छात्रों को एक साथ लाया गया, ताकि यह समझा जा सके कि भारत में वास्तुकला शिक्षा और व्यवहार में स्थिरता को सार्थक रूप से कैसे शामिल किया जा सकता है।
संगोष्ठी में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि हमारे देश के सामने मौजूद समकालीन चुनौतियाँ जैसे शहरी विस्तार, बदलता जलवायु परिदृश्य, शहरी बाढ़, और स्वच्छ जल व गुणवत्तापूर्ण आवास जैसे आवश्यक संसाधनों की लगातार कमी वास्तुकला की कल्पना, शिक्षा और अभ्यास में स्थिरता को केंद्रीय बनाती हैं। यह कार्यक्रम वास्तुकला संस्थानों के पाठ्यक्रम और शैक्षणिक संस्कृति में स्थिरता को सुदृढ़ करने पर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बना। केंद्रित चर्चाओं और विशेषज्ञों की अंतर्दृष्टियों के माध्यम से, प्रतिभागियों ने शैक्षणिक ढाँचों से आगे बढ़कर स्थिरता को वास्तविक पेशेवर अभ्यास में रूपांतरित करने के तरीकों पर विचार किया।
संगोष्ठी में तीन विषयगत पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिनमें वास्तुकला शिक्षा में स्थिरता के महत्वपूर्ण आयामों पर विचार किया गया। इन चर्चाओं में विभिन्न विषयों को शामिल किया गया, जैसे—कैम्पस को स्थिरता के “लिविंग लैबोरेट्री” के रूप में विकसित करना, निर्मित पर्यावरण में स्थिरता के सिद्धांतों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना, तथा पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए भविष्य के वास्तुकारों को आवश्यक ज्ञान और कौशल से सुसज्जित करने हेतु नवाचारपूर्ण शिक्षण दृष्टिकोण और पाठ्यक्रम सुधार।
इन चर्चाओं में प्रतिष्ठित प्रैक्टिशनर्स, शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों का एक विशिष्ट समूह शामिल हुआ। इनमें मनीषा अग्रवाल, फाउंडिंग पार्टनर, MO-OF आर्किटेक्ट्स/मोबाइल ऑफिसेस; अनुराग ताम्हंकर, निदेशक, बायोम एनवायरनमेंटल सॉल्यूशंस; डॉ. बेनी कुरियाकोस, प्रिंसिपल आर्किटेक्ट, बेनी कुरियाकोस एंड आर्किटेक्ट्स; गुरनीत सिंह, निदेशक, एनवायरनमेंटल डिजाइन सॉल्यूशंस; प्रसाद वैद्य, निदेशक, सोलर डेकाथलॉन इंडिया; डॉ. विशाल गर्ग, निदेशक, इंडोरामा वेंचर्स सेंटर फॉर क्लीन एनर्जी, प्लाक्षा यूनिवर्सिटी; राहुल पचौरी, निदेशक, शिक्षा मंत्रालय; अपूर्व विज, सीनियर डायरेक्टर, टेक्निकल डेवलपमेंट, ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल इंडिया; हबीब खान, पूर्व अध्यक्ष, काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर, शिक्षा मंत्रालय; जबीन ज़कारियास, प्रिंसिपल आर्किटेक्ट, जबीन ज़कारियास आर्किटेक्ट्स; डॉ. संजीव विद्यार्थी, प्रोवोस्ट, अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी; और ज़ीनत नियाज़ी, मुख्य सलाहकार, डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स शामिल थे।
सत्रों के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिरता को वास्तुकला शिक्षा के एक पूरक विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक मूलभूत घटक के रूप में शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। चर्चाओं में
अंतःविषयक शिक्षण, अनुभवात्मक शिक्षण पद्धतियों तथा अकादमिक जगत, उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया, ताकि ऐसे वास्तुकार तैयार किए जा सकें जो जटिल पर्यावरणीय और शहरी चुनौतियों का प्रभावी समाधान कर सकें।
विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर, इस संगोष्ठी ने भारत में वास्तुकला शिक्षा के भविष्य को आकार देने पर एक सहयोगात्मक संवाद को बढ़ावा दिया। इसने ऐसे पाठ्यक्रमों के निर्माण के महत्व को रेखांकित किया जो पारिस्थितिक वास्तविकताओं के अनुरूप हों और साथ ही छात्रों को स्थिरता को व्यावसायिक अभ्यास में ठोस परिणामों में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करें।
इस प्रकार की पहलों के माध्यम से, अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी डिजाइन, नीति और स्थिरता के संगम पर संवाद को आगे बढ़ाने का कार्य निरंतर कर रही है. यह ऐसे मंच तैयार कर रही है, जहां शैक्षणिक शोध, पेशेवर अभ्यास और सार्वजनिक नीति एक साथ आकर निर्मित पर्यावरण से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान खोजते हैं।
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