नित्य संदेश एजेंसी
नई दिल्ली। विशाखा पटनम से अभ्यास कर वापस लौट रहे ईरानी युद्धपोत 'डेना' हिंद महासागर में श्रीलंका के नजदीक एक अमेरिकी पनडुब्बी ने हमला कर उसे डुबो दिया। जहाज पर कुल 180 चालक दल सवार थे, जिनमें से 148 नाविक लापता बताए जा रहे हैं, वहीं कई स्रोत उनके मारे जाने की बात कह रहे हैं। इसके अलावा 32 नाविक गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
भारत ने बहुदेशीय नौसैनिक अभ्यास 'मिलन 2026' का आयोजन किया था। इसमें भाग लेने वालों में ईरानी नौसेना का युद्धपोत 'डेना' (Dena), भी शामिल था जो भारत के बुलावे पर इस अभ्यास में शामिल हुआ था... महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह जहाज कोई युद्धक जहाज नहीं था। यह भारत-ईरान के शांतिपूर्ण कूटनीतिक कार्यक्रम (MILAN) से लौट रहा था और भारत के बुलावे पर आया था। साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था, जब इस पर हमला हुआ। अब तक यह माना जा रहा था कि पश्चिम एशिया का संघर्ष केवल फारस की खाड़ी तक सीमित रहेगा। लेकिन इस घटना ने युद्ध की सीमाओं को बढ़ा दिया है।
श्रीलंका के निकट हिंद महासागर में हुआ यह हमला दर्शाता है कि अब युद्ध का दायरा दक्षिण एशिया के 'प्रभाव क्षेत्र' में प्रवेश कर चुका है। खाड़ी देशों के तटस्थ रहने और तुर्की द्वारा मार्ग बंद करने के बाद अमेरिका के पास रसद के विकल्प सीमित हो गए हैं। अमेरिका ने भारत को एक 'फॉलबैक' (विकल्प) बना लिया है। भारत के लिए यह स्थिति न केवल सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत जटिल हो गई है।
ईरान का यह जहाज भारत के निमंत्रण पर 'मिलन 2026' में आया था। भारतीय अतिथि के रूप में आए जहाज पर अमेरिकी हमला भारत की संप्रभुता और सुरक्षा गारंटी पर एक प्रश्नचिह्न लगाता है, यदि इसकी प्रतिक्रिया में भारत भी अन्य देशों की तरह अपने बंदरगाहों के विकल्प बंद कर देता है, तो हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना का संचालन लगभग असंभव हो जाएगा।
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