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Saturday, February 21, 2026

क्या अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुँचाने का प्रयास करना अपराध है?

नित्य संदेश। जैसे-जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेरठ आने का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सेंट्रल मार्केट के 1478 व्यापारियों की पीड़ा बढ़ती जा रही है। उनके प्रतिष्ठानों पर लाल निशान लगाए जा रहे हैं और ध्वस्तीकरण की तलवार उनके सिर पर लटक रही है। हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

आज जब मैं अयोध्या से लौटकर अपने घर पहुँचा, तो मेरे आवास पर दो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई। क्या लोकतंत्र में व्यापारियों की आवाज उठाना गुनाह है? क्या अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुँचाने का प्रयास करना अपराध है?

जिलाधिकारी को हमारे द्वारा पूर्व में पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री से प्रतिनिधिमंडल की भेंट का अनुरोध किया गया था, ताकि 1478 व्यापारियों की समस्याएँ सीधे उनके समक्ष रखी जा सकें। लेकिन आज तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। उल्टा हमारे घर पर पुलिसकर्मियों को भेज दिया गया। इसे ही अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला कहते हैं। इसे ही लोकतंत्र का गला घोंटना कहते हैं।

साथ ही, अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील किसान विरोधी और देशहित के खिलाफ है। इस समझौते से किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुँचेगा, इसलिए इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करने मेरठ आए। उनके साथ ऊर्जा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर सहित कई भाजपा नेता मौजूद रहे, लेकिन किसी ने भी व्यापारियों की पीड़ा उन तक पहुँचाने या मिलने का समय दिलाने का प्रयास नहीं किया।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री जी की जनसभा में भीड़ जुटाने के लिए विभिन्न विभागों—विशेषकर शिक्षकों—की ड्यूटी लगाई जा रही है, बसों की व्यवस्था की जा रही है और कर्मचारियों को रैली स्थल पर पहुँचने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

अंकुश चौधरी
प्रदेश प्रवक्ता / जिलाध्यक्ष
आम आदमी पार्टी, मेरठ
9410080920

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