नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। इंग्लिश लिटरेरी वीक–2026 के अंतर्गत आयोजित विश्वविद्यालय स्तरीय कौशल विकास कार्यक्रम के पाँचवें दिवस पर “जनरेशनल इकोज़” विषय पर एक आकर्षक काव्य-पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के भाषा विभाग द्वारा महिला सशक्तिकरण समिति एवं जेंडर सेंसिटाइज़ेशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
इस आयोजन ने काव्यात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से पीढ़ियों के बीच गूंजने वाली आवाज़ों, चिंताओं और सांस्कृतिक अनुभूतियों को समझने के लिए एक सार्थक मंच प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ औपचारिक स्वागत के साथ हुआ, जिसके पश्चात् दिवस की निर्णायक डॉ. निशा सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, मैनेजमेंट कॉलेज एवं वरिष्ठ प्रॉक्टर, को पारंपरिक पौध-प्रस्तुति के माध्यम से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय की पर्यावरण-सचेत एवं सम्मानपरक परंपरा को बनाए रखते हुए भाषा विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा तथा अंग्रेज़ी व विदेशी भाषाओं के प्रभारी एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. रफ़त खानम ने पौधा भेंट कर सम्मान प्रकट किया। इसके उपरांत जेंडर सेंसिटाइज़ेशन सेल की संयोजक डॉ. सारिका अभय तथा महिला सशक्तिकरण समिति की अध्यक्षा डॉ. अंशुल त्रिवेदी ने अपने आशीर्वचन साझा करते हुए विद्यार्थियों को निडर होकर अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया।
सभा को संबोधित करते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉ. रफ़त खानम ने विद्यार्थियों का स्वागत एवं उत्साहवर्धन करते हुए कहा - “यह मंच भावनात्मक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति का प्रतीक है और आज के प्रतिभागी मात्र प्रतियोगी नहीं, बल्कि अपनी रचनात्मकता एवं संवेदनशीलता से पहचान प्राप्त करते हुए उभरते कवि एवं कवयित्री हैं।” डॉ. रफ़त खानम, जो महिला सशक्तिकरण समिति की सदस्य भी हैं, उन्होंने अपनी स्व-रचित कविता “संपत्ति में समान अधिकार” का पाठ किया, जो महिला अधिकारों एवं सशक्तिकरण की पक्षधर एक सशक्त पीढ़ीगत गूँज के रूप में श्रोताओं को गहराई से प्रभावित कर गई। परिचय सत्र के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि काव्य-पाठ का माध्यम अंग्रेज़ी होगा तथा प्रतिभागियों को स्व-रचित एवं प्रकाशित दोनों प्रकार की कविताएं प्रस्तुत करने की अनुमति होगी। यह अत्यंत प्रेरणादायक रहा कि विद्यार्थियों ने अपने मौलिक अनुभवों पर आधारित रचनाओं के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद की।
सुभारती विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों — देवांशी, पावनी, जयदीप अरोड़ा, सामिया सिद्दीकी, अदिति बैक्सटर, जयश्री, विधि गोस्वामी, जिया, ज्योति चौधरी, छवि त्यागी, आकांक्षा धिगन, तायी तेची, ज़ाहिरा मेहनाज़ हसन आदि — ने मंच को काव्य की मधुरता और सुगंध से भर दिया। उनकी कविताओं में पितृसत्तात्मक व्यवस्था, लैंगिक भेदभाव, स्त्री-पुरुष असमानता, महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक सहयोग तंत्र, बाल-पोषण तथा अन्य सूक्ष्म पीढ़ीगत अनुभूतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को उठाया गया — जो हृदय में अनुभव किए जाते हैं, परंतु प्रायः अनसुने रह जाते हैं। श्रोताओं ने प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत विचारोत्तेजक एवं अभिनव दृष्टिकोण की सराहना की।
निर्णायक द्वारा सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के पश्चात् परिणाम घोषित किए गए:
पुरस्कार विजेता
• प्रथम स्थान — आकांक्षा धिगन, भाषा विभाग
• द्वितीय स्थान — विधि गोस्वामी, भाषा विभाग एवं जयश्री, लिबरल आर्ट्स विभाग
• तृतीय स्थान — अदिति बैक्सटर एवं दीपांशी, मैनेजमेंट कॉलेज
कार्यक्रम का संचालन एम.ए. अंग्रेजी द्वितीय सेमेस्टर की छात्राएँ यशिका एवं ज्योति द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित किया।
इस अवसर पर उपस्थित सम्मानित संकाय सदस्यों — डॉ. निशा सिंह, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. रणवीर सिंह, डॉ. अभिजीत शर्मा, डॉ. आशीष, डॉ. निशी सिंह, डॉ. प्रीति शर्मा, सुश्री सान्या अग्रवाल, सुश्री भावना जोशी, सुश्री सोनी चौहान तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अन्य संकाय सदस्यों — ने कार्यक्रम को प्रोत्साहन एवं अकादमिक समर्थन प्रदान किया। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की और इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे सार्थक आयोजनों के निरंतर संचालन की इच्छा व्यक्त की।

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