नित्य संदेश ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत में 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण घुटनों का दर्द तेजी से बढ़ रहा है। लंबे समय तक एडवांस आर्थराइटिस के लिए टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) को ही स्टैंडर्ड उपचार माना जाता रहा है, लेकिन अब सावधानीपूर्वक चुने गए मरीजों के लिए पार्शियल रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट एक बेहतर और कम इनवेसिव विकल्प के रूप में उभर रहा है।
आजकल पार्शियल नी रिप्लेसमेंट को अलग-अलग नामों जैसे MRP या माइक्रोप्लास्टी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन मूल रूप से ये सभी पार्शियल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी ही हैं। लेटेस्ट जनरेशन रोबोटिक्स के उपयोग से इस सर्जरी में इम्प्लांट की सटीक साइजिंग और पोजिशनिंग, सही लिगामेंट बैलेंस और अधिक नेचुरल मूवमेंट हासिल किया जा सकता है। हमारा उद्देश्य सिर्फ दर्द कम करना नहीं, बल्कि मरीज को यह महसूस कराना है कि उसका अपना घुटना सुरक्षित है।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं चीफ रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चेयरमैन डॉ. रमणीक महाजन ने बताया* “पार्शियल नी रिप्लेसमेंट उन मरीजों के लिए आदर्श है जिनका आर्थराइटिस घुटने के केवल एक हिस्से, अधिकतर अंदरूनी (मेडियल) हिस्से तक सीमित होता है। इस प्रक्रिया में पूरे जॉइंट को बदलने के बजाय केवल खराब हिस्से का उपचार किया जाता है, जबकि स्वस्थ हड्डी और कार्टिलेज को सुरक्षित रखा जाता है। इस सर्जरी में किसी भी लिगामेंट को नहीं काटा जाता।
रोबोटिक गाइडेंस के कारण यह प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक सटीक और प्रेडिक्टेबल हो गई है। कम उम्र और अधिक सक्रिय मरीजों के लिए यह विकल्प विशेष रूप से फायदेमंद है। कई लोग कम उम्र में टोटल नी रिप्लेसमेंट कराने से इसलिए हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हें भविष्य में इम्प्लांट घिसने या दोबारा सर्जरी की चिंता रहती है। पार्शियल नी रिप्लेसमेंट में नेचुरल जॉइंट का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रहता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है, मूवमेंट बेहतर होती है और कई मामलों में भविष्य में टोटल नी रिप्लेसमेंट की जरूरत को टाला या रोका जा सकता है।“
माको रोबोटिक सिस्टम प्रत्येक मरीज की यूनिक एनाटॉमी के आधार पर मिलीमीटर स्तर पर सर्जरी की प्लानिंग करने में सक्षम बनाता है। प्री-ऑपरेटिव 3D इमेजिंग से एक पर्सनलाइज्ड सर्जिकल मैप तैयार किया जाता है और ऑपरेशन के दौरान रोबोटिक आर्म सर्जन को सटीक एलाइनमेंट हासिल करने में मदद करता है, जिससे केवल प्रभावित हिस्से का उपचार होता है और स्वस्थ संरचनाएं सुरक्षित रहती हैं। इससे टिश्यू डैमेज कम होता है, पोस्ट-ऑपरेटिव दर्द घटता है और लॉन्ग-टर्म रिजल्ट बेहतर होते हैं।
इस सर्जरी के बाद मरीजों को आमतौर पर केवल एक दिन अस्पताल में रहना पड़ता है। अधिकांश मरीज ऑपरेशन के दिन ही चलना शुरू कर देते हैं और कुछ ही हफ्तों में अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आते हैं। क्योंकि सर्जरी कम इनवेसिव है और घुटना अधिक नेचुरल महसूस होता है, इसलिए मरीजों का आत्मविश्वास भी जल्दी लौटता है।
महत्वपूर्ण लिगामेंट, विशेषकर एंटीरियर क्रूशिएट लिगामेंट (ACL), को सुरक्षित रखने से घुटने की स्थिरता, संतुलन और मूवमेंट बेहतर रहती है, जिससे टोटल नी रिप्लेसमेंट की तुलना में अधिक स्वाभाविक चलने का अनुभव मिलता है।

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