तरुण आहूजा
नित्य संदेश, मेरठ। बसंत पंचमी अभी दो माह दूर है (23 जनवरी 2026) लेकिन शहर के कई इलाकों में पतंगबाज़ी की शुरुआत साफ दिख रही है। पर खुशी के साथ एक बड़ा खतरा भी लौट रहा है: तेज-कतरने वाली, ग्लास/नायलॉन कोटेड "चाइनीज़ मांझा" — जो पहले भी कई बार जानलेवा साबित हो चुका है।
*क्या हुआ — हालिया घटनाओं का संक्षेप*
जनवरी 2025 में मेरठ में एक युवक की गर्दन चाइनीज़ मांझे से कटने के कारण उसकी मौत हुई — घटना का वीडियो और खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई और पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया।
इसी तरह के कई मामले देश के अलग-अलग शहरों में रिपोर्ट हुए हैं — किसी का गला कटना, किसी के हाथ-आँगुलियाँ गंभीर रूप से घायल होना; कुछ स्थानों पर तो पक्षियों और पालतू जानवरों की भी मौतें दर्ज हुईं। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने न केवल चेतावनी दी बल्कि चाइनीज़ मांझे बेचने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए।
*क्यों खतरनाक है चाइनीज़ मांझा?*
चाइनीज़ मांझा आम रुई-धागे के बजाय नायलॉन/सिंथेटिक्स पर ग्लास-पाउडर या धातु-कोटिंग से बनाया जाता है। यह पतला लेकिन बेहद तेज होता है — हवा में तनकर चलते हुए भी राहगीनों, बाइक सवारों और पक्षियों के गले/हाथ/पंख पर गंभीर कट लगा सकता है। कई wildlife और पशु-रक्षा संस्थाओं ने इस पदार्थ को पर्यावरण और वाइल्डलाइफ के लिए भी बहुत खतरनाक बताया है।
*मेरठ के बाजारों की स्थिति*
मेरठ के सेंट्रल मार्केट, सदर चौक और कई मंडियों में पतंग-दुकानें पहले ही जुटने लगी हैं — कई दुकानों पर देसी सूती मांझे के साथ सस्ते, संदिग्ध स्रोत के मांझे भी मिलते पाए गए हैं। वीडियो और लोकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ विक्रेता गुपचुप तरीके से भी जोखिम भरा मांझा बेच रहे हैं। प्रशासन ने ऐसे विक्रेताओं की पहचान कर रेड चलाने के आदेश दिए हैं।
*प्रशासन और पुलिस क्या कर रही हैं*
मेरठ जोन-लेवल अधिकारियों (एडीजी/एसएसपी) ने निर्देश दिए हैं कि चाइनीज़ मांझा बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों पर मुकदमा दर्ज किया जाए और त्योहारों तक लगातार अभियान चलाया जाए। अधिकारियों ने बाजारों की चिन्हित जगहों पर छापेमारी तेज करने का आदेश दिया है। कुछ जिलों में पुलिस ने सार्वजनिक वार्निंग्स, मोबाइल पीआर-वैन और सोशल-मीडिया अलर्ट के ज़रिये लोगों को सावधान किया है।
*नागरिकों के लिए सटीक सुरक्षा सुझाव (रैपिड चेकलिस्ट)*
1. चाइनीज़ मांझा न खरीदें, न रखें, न उड़ाएँ। खरीदते/बेचते पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
2. पतंग खरीदते समय लेबल देखें — 100% सूती/कॉटन मांझा लें; नायलॉन/ग्लास-कोटेड वाले से रहें दूर।
3. सड़कों पर बाइक चलाते समय— फुल-फेस हेलमेट और कंधे/सीने पर कपड़ा/नेट का प्रयोग करें; संभव हो तो भीड़-भाड़ वाले समय में रूट बदलें।
4. बच्चे को सिखाएं: खुले स्थान पर पतंग उड़ाएँ, तारों/बिजली पोस्ट के पास न जाएँ।
5. अगर बाजार में अवैध मांझे की बिक्री दिखे तो पुलिस/कानूनी नंबर पर तुरन्त सूचना दें (लोकल थाने का नंबर, 112)।
*पक्षियों और वाइल्डलाइफ़ पर असर*
चुंकि यह धागा हवा में बिखरकर पेड़ों और तारों पर फँस जाता है — पक्षियों के पंख उसमें उलझते हैं, पंख कटते हैं और वे उड़ नहीं पाते; कई बार उनकी मृत्यु भी हो जाती है। कई एनीमल-रेक्यू और वाइल्डलाइफ़ संगठनों ने सार्वजनिक चेतावनी जारी की है।
*प्रशासन से अपेक्षित क़दम (सुझाव)*
त्यौहार से पहले विस्तृत रैम्प-अप रेड: चिन्हित दुकानों पर छापेमारी व जप्ती।
ठोस जनजागरूकता अभियान — स्कूलों, रोटरी क्लब, कॉल-टाउन हॉल आदि में सेमिनार।
सुरक्षित विकल्पों (कॉटन मांझा) की सब्सिडी या प्रचार ताकि सस्ते, खतरनाक मांझे की मांग घटे।
अस्पतालों/आपात-सेवाओं को भी त्योहार के दौरान तत्पर रखा जाए।
बसंत पंचमी और पतंग-त्योहार का मेल सुंदर और सांस्कृतिक है — पर इसे जीवन और पर्यावरण के ख़तरे में डालने का अधिकार किसी के पास नहीं। मेरठ के नागरिकों, दुकानदारों और प्रशासन—तीनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इस बार आसमान खूबसूरती से भरे, नाक़ल-ख़तरे से नहीं।
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