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Monday, September 15, 2025

"आत्महत्या रोकथाम चेतावनी संकेतों की समझ और निवारक उपाय" विषय पर हुई इंटरएक्टिव कार्यशाला


नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। मुख्य छात्रावास अधीक्षक (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय) एवं मानसिक स्वास्थ्य मिशन इंडिया के सहयोग से "आत्महत्या रोकथाम चेतावनी संकेतों की समझ और निवारक उपाय" विषय पर एक इंटरएक्टिव कार्यशाला का आयोजन पंडित दीन दयाल उपाध्याय बॉयज हॉस्टल में किया गया। 

यह कार्यशाला विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर संस्था द्वारा मनाए जा रहे विश्व सुसाइड प्रिवेंशन वीक –2025 के अंतर्गत आयोजित की गई। जिसका उद्देश्य छात्रावास में रह रहे छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और आत्महत्या के संभावित चेतावनी संकेतों की पहचान करना था। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में दीवान पब्लिक स्कूल में कार्यरत काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट चारु दहिया रहीं, जिन्होंने बताया कि आज सुसाइड विश्व में मृत्यु का युवाओं ने चौथा बड़ा कारण है और पश्चिमी देशों में कहीं कही दूसरे नंबर है। उन्होंने ने कहा के विश्व में हर साल एक बड़ी संख्या में लोग हर वर्ष सुसाइड करते हैं जिनमें युवाओं का प्रतिशत सबसे ज्यादा होता है। उन्होंने कहा के हमारे देश में ज्यादातर पुरुषों पर हर वक्त अच्छी नौकरी, पाने और सक्सेस जल्दी पा लेने का दबाव होता है साथ ही परेशानियों में मर्द को दर्द नहीं होता कहकर रोने से भी रोक दिया जाता है। पर अगर जिंदगी में समस्याएं हैं तो उनके समाधान शेयर करने से होते हैं, अगर मन मे रोना आता है तो वे रो सकते हैं इससे हम नकारात्मक विचारों और इमोशंस से बचाओ कर सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि जिन लोगों में किसी बजह से सुसाइड जैसे विचार आते हैं तो ज्यादा ऐसे लोगों का दिमाग खुद के नियंत्रण में नहीं होता है जिस वजह से वे खुद को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार कर बैठते हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारे समाज में सुसाइड को लेके कई मिथ हैं जैसे कि जो कहते हैं वो सुसाइड नहीं करते पर सुशांत सिंह जैसे लोगों ने पहले से हे संकेत दे दिए थे कि वो बहुत तकलीफ में है और उसे मदद चाहिए जो कि उसने एक फोटो के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया था पर किसी ने उन संकेतों को भी पहचाना। 

उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास कोई हर बात पे रो देने वाला कोई हो, अन्दर से दुखी मिलें, रात में नींद आने में दिक्कत हो, निराशा भरा व्यवहार हो, किसी नशे वाले पदार्थ का सेवन करने लगा हो, खाने का पैटर्न बदल जाए, खुद को कमरे में बंद करने लगा हो, सुसाइड के विचार आने लगे हों तो ऐसे में उसे मदद की जरूरत होती है उसमें हम खुद भी हो सकते हैं या हमारा कोई साथी या परिवार जन हो सकता है और ऐसे में उससे बात करना चाहिए और साइकोलॉजिस्ट से प्रोफेशनल मदद लेने को प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये करके हम कई जिंदगियां बचा सकते हैं। 

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतिदिन योग, मेडिटेशन, एवं मॉर्निंग वॉक करने की सलाह दी।बकार्यक्रम में दूसरे वक्त आरसीआई पंजीकृत मनोवैज्ञानिक एवं विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं काउंसलिंग सेंटर में मनोवैज्ञानिक के रूप में सहयोग कर रहे प्रो० संजय कुमार ने कार्यक्रम में बताया कि NCRB के अनुसार वर्ष 2022 में लगभग १३००० विद्यार्थियों ने सुसाइड किया था। इसलिए इस विषय विद्यार्थियों से बात करना जरूरी है। 

उन्होंने कहा कि आज मोबाइल के बढ़ते उपयोग से एकाकीपन बढ़ रह है और बढ़ती महंगाई, स्किल में कमी और रोजगार की दिक्कतें, युवाओं ने चिंता बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में समस्याएं तो आएंगी ही पर उनका समाधान हमारे हाथ होता है जिसे हम किसी की सहायता से जरूर निपटा सकते हैं पर हर बार अकेले नहीं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को सुसाइड जैसे विचार बार बार आते हैं तो और उससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो वे विश्वविद्यालय स्थित साइकोलॉजिकल काउंसलिंग सेंटर में निःशुल्क संपर्क कर सकते हैं। अगर कोई चाहे तो वे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर न्यूज एंड इवेंट सेक्शन में 9 सितंबर को डाले गए लिंक से सुसाइड के विचारों और डिप्रेशन का मापन भी कर सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन एम एच एम इंडिया की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट प्रिया पाल और सोफिया ने किया एवं कार्यक्रम में छात्रावास अधीक्षक, विजय कुमार राय, एवं सहायक छात्रावास अधीक्षक इंजीनियर पत्लीयांक सिरोही और विजय सिंह उपस्थित रहे साथ ही कार्यालय सहायक राहुल सिंह, आदेश सैनी और दासराम ने सहयोग किया। इस दौरान छात्रावास में रह रहे सभी विद्यार्थी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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