नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा पृथ्वी दिवस 2026 के अवसर पर “Ecosystem & Biodiversity Conservation” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।
“Our Power, Our Planet” थीम पर आधारित इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करना रहा। कार्यक्रम का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया, जिसमें देशभर से शिक्षाविद, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10:00 बजे पंजीकरण से हुई, जिसके पश्चात 11:55 बजे उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. रामाकांत ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्यों एवं महत्व पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि ए.एन.आर.एफ.-पी.एम. (ANRF-PM) के प्रो. वी. के. बरनवाल ने अपने संबोधन में जैव विविधता संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं कीनोट वक्ता प्रो. अरुण कुमार पांडेय (प्रो-कुलपति, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी, भोपाल) ने “The Changing Paradigm of Flowering Plants Systematics” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से पुष्पीय पौधों के वर्गीकरण में हो रहे बदलाव जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. रामाकांत ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि पृथ्वी को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसके लिए जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।
इसके पश्चात तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. जितेंद्र कुमार एवं सह-अध्यक्षता डॉ. सचिन कुमार ने की। इस सत्र में प्रो. अरुण कुमार पांडेय का विस्तृत कीनोट व्याख्यान हुआ, जिसमें उन्होंने वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध एवं उनके अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला।
द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. विजय मलिक एवं सह-अध्यक्षता डॉ. अशोक कुमार द्वारा की गई। इस सत्र में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के प्रो. आनंद नारायण सिंह ने “Forest: A Sentinel of the Environment” विषय पर व्याख्यान देते हुए वनों को पर्यावरण का प्रहरी बताया तथा उनके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के समापन पर विभागाध्यक्ष डॉ. रामाकांत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
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