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Saturday, October 17, 2026

सुभारती विश्वविद्यालय में ई-वेस्ट प्रबंधन पर विशेषज्ञ व्याख्यान, डॉ. मुकेश रुहेला ने बताया पर्यावरण संरक्षण का महत्व

 



ई-कचरे का सही निस्तारण बचाएगा पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन, विद्यार्थियों से जिम्मेदार उपभोग अपनाने का आह्वान

 

नित्य संदेश ब्यूरो


मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में अंतरराष्ट्रीय ई-वेस्ट दिवस 2026 के अवसर पर “ई-वेस्ट प्रबंधन: एक सतत दृष्टिकोण” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय की पर्यावरण समिति एवं छात्र परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान, उसके सुरक्षित निस्तारण और संसाधनों के पुनः उपयोग के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का समन्वय फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने किया।



कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पर्यावरण अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश रुहेला ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के साथ ई-कचरे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अनुपयोगी होने के बाद उनका गलत तरीके से निस्तारण पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए ई-कचरे को केवल अनुपयोगी वस्तु समझकर फेंकने के बजाय उसका वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन करना आवश्यक है।



डॉ. मुकेश रुहेला ने कहा कि ई-कचरे का उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कई ऐसी मूल्यवान सामग्रियां होती हैं, जिन्हें पुनर्चक्रण के माध्यम से दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है। यदि इन सामग्रियों का सही तरीके से पुनः उपयोग किया जाए, तो प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को कम करने, प्रदूषण पर नियंत्रण रखने और नए कच्चे माल की मांग घटाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए कहा कि ई-कचरे को सामान्य घरेलू या नगर पालिका कचरे के साथ नहीं मिलाना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुले में जलाना, उन्हें अनधिकृत तरीके से तोड़ना या उनके पुर्जों को असुरक्षित परिस्थितियों में अलग करना स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार एकत्रित कर अधिकृत ई-वेस्ट संग्रहण एवं पुनर्चक्रण केंद्रों तक पहुंचाना चाहिए।



उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदते समय अपनी वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखें और केवल नई तकनीक या फैशन के कारण पुराने, उपयोगी उपकरणों को बदलने से बचें। उपकरणों की नियमित देखभाल और समय पर मरम्मत करके उनकी उपयोग अवधि बढ़ाई जा सकती है। जब कोई उपकरण पूरी तरह अनुपयोगी हो जाए, तो उसे सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय अधिकृत केंद्र के माध्यम से निस्तारित करना चाहिए।



डॉ. मुकेश रुहेला ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। विद्यार्थी अपने परिवारों, मित्रों और आसपास के समुदायों को ई-वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण, जिम्मेदार उपभोग और पुनर्चक्रण के प्रति जागरूक करके महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। छोटी-छोटी जिम्मेदार आदतें भी पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने में बड़ा योगदान दे सकती हैं।



कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों ने ई-वेस्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। इस अवसर पर कुल विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. श्वेता भारद्वाज ने किया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और ई-कचरे के सुरक्षित प्रबंधन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

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