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Tuesday, October 13, 2026

एक सुबह, एक हादसा और जीवन के प्रति कृतज्ञता



17 सितंबर 2026 — मेरी साइकिल यात्रा का एक अविस्मरणीय दिन


प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान

नित्य संदेश। 17 सितंबर 2026 की सुबह थी। अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार मैं सुबह 4 बजे साइकिल लेकर घर से निकल पड़ा। मेरा उद्देश्य रोज़ की तरह साइकिल चलाना, प्रकृति के करीब रहना और स्वस्थ जीवन के अपने संकल्प को आगे बढ़ाना था।


मवाना रोड की ओर बढ़ते हुए मैं मवाना रोड और देहरादून रोड को जोड़ने वाली सड़क से दौराला होते हुए मोदीपुरम मेट्रो स्टेशन पहुँचा। तभी अचानक तेज़ आंधी शुरू हो गई। मैंने कुछ देर स्टेशन पर रुककर मौसम सामान्य होने का इंतज़ार किया, लेकिन थोड़ी ही देर में बारिश भी शुरू हो गई। मैंने सावधानी बरतते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ना शुरू किया। डोरली मेट्रो स्टेशन से आगे रुड़की रोड पर एक पेट्रोल पंप के पास रुककर मैंने फेसबुक लाइव किया। उस समय सुबह के लगभग 6 बजे थे। मैंने लोगों से निवेदन किया कि आंधी और बारिश बहुत तेज़ है, इसलिए जो लोग हाईवे पर यात्रा कर रहे हैं, वे सुरक्षित स्थान पर रुक जाएँ। कहीं जल्दबाज़ी में किसी का एक्सीडेंट न हो जाए। लाइव समाप्त करने के बाद मैं फिर साइकिल लेकर चल पड़ा।


एक विचार, जिसने रास्ता बदल दिया

आगे बढ़ते हुए मेरे मन में विचार आया कि यदि मैं टैंक चौराहे से माल रोड की तरफ जाऊँगा, तो रास्ते में बहुत सारे पेड़ पड़ेंगे। तेज़ आंधी में पेड़ गिरने का खतरा था। इसलिए मैंने उस रास्ते से न जाने का निर्णय लिया और बेगम पुल होते हुए छिपी टैंक की ओर बढ़ गया। मुझे क्या पता था कि रास्ता बदलने का यह निर्णय मुझे एक दूसरे खतरे से तो बचा सकता है, लेकिन कुछ ही पलों में एक अलग हादसा मेरा इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही मैं आर.जी. डिग्री कॉलेज के सामने पहुँचा, वहाँ सड़क पर डायवर्जन किया हुआ था। मैं दाईं ओर डिवाइडर के साथ अपनी साइकिल लेकर आगे बढ़ रहा था। मेरी साइकिल पर लाइट भी लगी हुई थी। तभी अचानक एचडीएफसी बैंक के सामने एक स्कूटी पर सवार दो लड़कों ने मेरी साइकिल को सामने से टक्कर मार दी। एक पल में सब कुछ बदल गया। मैं सड़क पर गिर पड़ा। कुछ क्षणों तक मुझे समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है।


हेलमेट ने बचाई जान, लेकिन हाथ में हुआ फ्रैक्चर

सड़क पर बैठे-बैठे सबसे पहले मैंने अपने हाथ-पैर जाँचे कि कहीं कोई बड़ी चोट या फ्रैक्चर तो नहीं है। धीरे-धीरे होश संभला, तो दाएँ हाथ की कलाई में दर्द महसूस हुआ। घुटने, हाथ और कंधे भी छिल गए थे। लेकिन उस समय मेरे लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह थी कि मैंने हेलमेट पहना हुआ था। हेलमेट ने मुझे संभावित गंभीर सिर की चोट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मैंने भगवान का शुक्र अदा किया कि मेरी जान बच गई। जिस स्कूटी से मेरी साइकिल टकराई थी, उसी पर सवार लड़कों से मैंने कहा कि मेरी साइकिल के बैग में रखा मोबाइल निकालकर दे दें। इसके बाद मैंने अपने पैथोलॉजी सेंटर, हेल्थ चेक डायग्नोस्टिक्स, जो घटनास्थल से लगभग 50 मीटर की दूरी पर था, वहाँ जावेद को फोन किया। मैंने उसे बताया कि मेरा एक्सीडेंट हो गया है और वह तुरंत मेरे पास आ जाए। जावेद बिना देर किए वहाँ पहुँच गया। उसने मेरी साइकिल उठाई और मैं उसके साथ पैदल अपने सेंटर की ओर चल दिया। रास्ते में होप हॉस्पिटल से मैंने दर्द का इंजेक्शन खरीदा और सेंटर पर जावेद से लगवाया। इसके बाद मैंने उससे एक ई-रिक्शा की व्यवस्था करने को कहा, ताकि मैं सुरक्षित अपने घर, साकेत, पहुँच सकूँ।जावेद ने ई-रिक्शा का इंतज़ाम किया और मैं घर पहुँच गया।


घर पहुँचकर भी मुझे अंदाज़ा नहीं था कि हाथ में फ्रैक्चर है

घर पहुँचते ही मैं सीधे बाथरूम में गया, कपड़े बदले और लगभग एक घंटे तक चोट वाली जगहों पर बर्फ से सिकाई की। उसके बाद पूरे दिन आराम किया। लेकिन रात होते-होते दाएँ हाथ में असहजता बढ़ने लगी। हाथ को थोड़ा-सा हिलाने पर भी दर्द हो रहा था। मुझे लगा कि अब एक्स-रे करवाना आवश्यक है। मैं हेल्थ केयर में डॉक्टर संजय गुप्ता के पास पहुँचा। एक्स-रे रिपोर्ट ने स्थिति स्पष्ट कर दी—मेरे दाएँ हाथ में दो जगह फ्रैक्चर था। रिपोर्ट लेकर मैं सीधे डॉक्टर राहुल नेहरा के पास पहुँचा। उन्होंने मेरे हाथ पर एक महीने के लिए प्लास्टर लगाया, जिसे 17 अक्टूबर को काटा जाना निर्धारित हुआ। इस तरह जिस चोट को मैंने शुरुआत में सामान्य समझा था, वह वास्तव में दो जगह का फ्रैक्चर निकली। जीवन में हम अक्सर अपनी दिनचर्या, लक्ष्य और योजनाओं में इतने व्यस्त रहते हैं कि यह भूल जाते हैं कि अगले पल क्या होने वाला है। कभी-कभी एक छोटी-सी घटना हमें अपनी सुरक्षा, अपने स्वास्थ्य और अपने आसपास के लोगों के महत्व का एहसास करा देती है। आज मैं इस घटना को याद करते हुए ईश्वर के प्रति कृतज्ञ हूँ। मुझे राहत है कि मैं सुरक्षित हूँ और उपचार के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहा हूँ। मेरी सभी साइकिल चलाने वालों और सड़क पर यात्रा करने वाले लोगों से अपील है—सुरक्षा को कभी हल्के में न लें। मंज़िल पर कुछ मिनट देर से पहुँचना स्वीकार्य है, लेकिन अपनी जान जोखिम में डालना नहीं। याद रखिए, जीवन अनमोल है। स्वस्थ रहना जितना ज़रूरी है, सुरक्षित रहना भी उतना ही ज़रूरी है। सुरक्षित चलें, सतर्क रहें और जीवन का सम्मान करें।


प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान 

 संस्थापक

 साइक्लोमैड फिट इंडिया

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