Breaking

Your Ads Here

Thursday, September 17, 2026

महिलाओं की धार्मिक और नैतिक शिक्षा से ही नेक समाज का निर्माण संभव: उलेमा-ए-किराम



जमीयत उलेमा मुज़फ्फरनगर के तत्वावधान में 'इस्लाह-ए-मुआशरा' महिला कार्यक्रम का आयोजन


नित्य संदेश ब्यूरो

मुज़फ्फरनगर। महिलाओं की धार्मिक और नैतिक शिक्षा तथा समाज सुधार के उद्देश्य से जमीयत उलेमा मुज़फ्फरनगर के तत्वावधान में गत दिवस मदीना गार्डन, अम्बा विहार में एक विशेष महिला कार्यक्रम 'इस्लाह-ए-मुआशरा' का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता जमीयत उलेमा मुज़फ्फरनगर के उपाध्यक्ष हजरत मौलाना मोहम्मद गुलज़ार कासमी साहब ने की, जबकि निगरानी जामियातुस्सालिहात मुज़फ्फरनगर के नाज़िम हाफिज़ मोहम्मद याकूब रशीदी साहब ने की। कार्यक्रम का संचालन मौलाना इशाअत साहब ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ हाफिज़ मोहम्मद फरहान द्वारा तिलावते कलाम-ए-पाक से हुआ। इसके बाद मोहम्मद अरहम अब्बासी ने नअत-ए-रसूल-ए-मकबूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और अब्दुल अहद अंसारी ने हम्द-ए-बारी तआला पेश की। छात्राओं आयशा याकूब, सना मोहम्मद गुलज़ार, अलीशा फखर और हिफ्जा नादिर ने भी नअत पेश की।



कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुफ्ती मोहम्मद सालिम कासमी साहब ने कहा कि महिलाओं को दीन की बुनियादी तालीम से जुड़े रहना चाहिए और घरों में दीनी माहौल कायम करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को मकतब से जरूर जोड़ा जाए, क्योंकि मकतब ही बच्चों के दीनी जीवन की बुनियाद को मजबूत करता है। हजरत मौलाना मोहम्मद गुलज़ार कासमी साहब ने अपने खिताब में समाज में फैली बुराइयों, विशेषकर सूदी लेन-देन से बचने, इस्लामी पर्दे की पाबंदी और पांच वक्त की नमाज की अहमियत पर रोशनी डाली और घरेलू जीवन में अल्लाह के खौफ और आखिरत की जवाबदेही के साथ जिंदगी गुजारने की नसीहत दी।


जमीयत के वरिष्ठ नेता कारी आज़म साहब ने कहा कि दीनी तालीम सिर्फ उलेमा तक सीमित नहीं, बल्कि हर मुस्लिम मर्द और औरत पर जरूरी है। एक मजबूत दीनी परिवार ही एक बेहतर और नेक समाज की बुनियाद बन सकता है। कार्यक्रम के अंत में समाज सुधार, महिलाओं की दीनी तालीम, नई नस्ल की सही इस्लामी परवरिश और उम्मत-ए-मुस्लिमा की भलाई के लिए विशेष दुआ की गई। 

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here