नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शास्त्री नगर सेक्टर-2 में पिछले लगभग 150 दिनों से महिलाएं धरने पर बैठी हैं। 2 सितंबर को भी मेरठ में एक बड़ा जन आंदोलन हुआ था, जिसे अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद स्थगित किया गया था। अब एक बार फिर जन आंदोलन की बात सामने आ रही है, जिस पर मेरठ व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी नेता शैंकी वर्मा ने सवाल खड़े किए हैं।
शैंकी वर्मा ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि "हमारी लड़ाई सरकार से नहीं है" तो फिर यह लड़ाई आखिर किससे है। मेरठ में ट्रिपल इंजन की सरकार है - केंद्र, प्रदेश और स्थानीय स्तर पर भाजपा की सरकार एवं सत्ता का प्रभाव है। ऐसे में जनता के इतने लंबे संघर्ष के बावजूद यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं स्पष्ट रूप से पूछना चाहता हूं कि 150 दिन के धरने के बाद भी यदि सरकार से कोई लड़ाई नहीं है, तो जन आंदोलन किसके खिलाफ और किस उद्देश्य से किया जा रहा है? जनता को यह स्पष्ट होना चाहिए कि आंदोलन वास्तव में अपने अधिकारों के लिए है या फिर किसी राजनीतिक दबाव, व्यक्तिगत हित अथवा आपसी खींचतान का माध्यम बन रहा है।" वर्मा ने कहा कि 2 सितंबर के आंदोलन में भारी बारिश के बावजूद मेरठ की जनता और व्यापारियों ने जिस तरह अपना समर्थन दिया, वह इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।
"हमारा स्पष्ट मत है कि किसी भी सरकार से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, लेकिन जनता के अधिकारों से बड़ा कोई सरकार या अधिकारी नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री या सांसद कोई भगवान नहीं, बस जनता के सेवक हैं। यदि सरकार सही है तो उसे जनता के सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए और यदि अधिकारी स्तर पर समस्या पैदा की जा रही है तो सरकार को ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।"
उन्होंने कहा कि जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि मांग क्या है, सरकार से उनकी बातचीत क्या हुई है और अब दोबारा आंदोलन की आवश्यकता क्यों पड़ी। जनता को आंदोलन चाहिए, लेकिन साफ नीयत और स्पष्ट उद्देश्य के साथ। जनता के नाम पर राजनीति नहीं, जनता के हित में समाधान चाहिए।

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