-विभाजन की विभीषिका कार्यक्रम में
विस्थापित परिवारों की पीड़ा ने झकझोरा
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। एक तरफ हाथों में तिरंगा था,
आंखों में आजाद भारत का गौरव और दिल में राष्ट्रप्रेम का जज्बा... दूसरी तरफ उसी तिरंगे
के पीछे छिपी उस पीड़ा की याद थी, जब आजादी के साथ देश ने बंटवारे का असहनीय दर्द भी
झेला था। शुक्रवार को मेरठ ने इतिहास की इसी पीड़ा और वर्तमान के राष्ट्रप्रेम को एक
साथ महसूस किया। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में विभाजन विभीषिका स्मृति
दिवस पर जब 1947 के विस्थापन, हिंसा और अपनों से बिछड़ने की तस्वीरें सामने आईं तो
माहौल भावुक हो उठा। वहीं, शहर की सड़कों पर निकली पुलिस की तिरंगा यात्रा ने इसी दर्द
से निकलकर एकजुट भारत का जोश दिखाया।
शुक्रवार को मेरठ में विभाजन की
पीड़ा और आजादी का उत्सव एक ही भाव में दिखाई दिए। अटल सभागार में आंखें उस इतिहास
को याद कर नम हुईं, जिसे भुलाया नहीं जा सकता और शहर की सड़कों पर तिरंगा यह संदेश
देता नजर आया कि उन जख्मों से सीख लेकर भारत को और मजबूत बनाना है। 1947 ने देश को
बंटने का दर्द दिया था, लेकिन आज उसी भारत का तिरंगा करोड़ों दिलों को जोड़ने की ताकत
बन चुका है। मेरठ की तिरंगा यात्रा इसी बदलते भारत की तस्वीर बनी—दर्द की स्मृति से
एकता का संकल्प और तिरंगे के साथ अखंड भारत के भविष्य का विश्वास। अटल सभागार में लगी
प्रदर्शनी और विभाजन पर आधारित फिल्म ने उस दौर की कहानी बयां की, जब लाखों लोगों को
रातोंरात अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। किसी ने अपना पुश्तैनी घर छोड़ा, किसी ने खेत-खलिहान,
तो कोई अपने प्रियजनों से हमेशा के लिए बिछड़ गया। सामान से ज्यादा लोगों के साथ उनकी
यादें और दर्द भारत पहुंचे। विस्थापित परिवारों के परिजनों ने जब अपने अनुभव साझा किए
तो इतिहास किताबों से निकलकर आंखों के सामने जीवंत हो उठा। राजेश दीवान और सुरेश छावड़ा
ने अपने परिवारों की पीड़ा और संघर्ष को साझा किया। सभागार में मौजूद लोगों ने महसूस
किया कि विभाजन केवल नक्शे पर खिंची एक लकीर नहीं था, बल्कि लाखों जिंदगियों में आई
ऐसी दरार थी, जिसका दर्द पीढ़ियों तक महसूस किया गया। विस्थापित परिवारों के परिजनों
को सम्मानित करते समय उनके संघर्ष को नमन किया गया। स्कूली बच्चों की देशभक्ति प्रस्तुतियों
ने भावुक माहौल को राष्ट्रप्रेम की ऊर्जा में बदल दिया।
किसी एक समुदाय का दर्द नहीं था
विभाजन
राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डा.
सोमेंद्र तोमर ने कहा कि विभाजन इतिहास का ऐसा दर्दनाक अध्याय है, जिसे भुलाया नहीं
जा सकता। इस त्रासदी से सीख लेकर देश की एकता और अखंडता को मजबूत करना ही सच्ची श्रद्धांजलि
है। सिवालखास विधायक गुलाम मोहम्मद ने कहा कि विभाजन का दर्द किसी एक समुदाय का नहीं
था। हर वर्ग के लोगों ने उसकी पीड़ा झेली। आज जरूरत उस दर्द को नफरत में नहीं, बल्कि
भाईचारे और सद्भाव में बदलने की है।
तिरंगे के नीचे एकजुट हुआ मेरठ
विभाजन की पीड़ा को याद करने के
बाद जब लोगों ने हाथों में तिरंगा थामा तो माहौल बदल गया। देशभक्ति के नारों के बीच
एकता और राष्ट्रप्रेम का संकल्प लिया गया। मानो 1947 के बंटवारे के दर्द से 2026 का
भारत एक संदेश दे रहा हो कि अब देश को जोड़कर ही आगे बढ़ना है। इसी संकल्प को शहर की
सड़कों तक पहुंचाते हुए पुलिस लाइन से भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई।
हरी झंडी दिखाकर यात्रा को किया
रवाना
एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने यात्रा
को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वर्दी में तिरंगा थामे पुलिसकर्मियों का जोश देखते
ही बना। सीओ कोतवाली संग्राम सिंह सरकारी वाहन छोड़कर बाइक पर सवार हुए और हाथ में
तिरंगा लेकर जवानों के साथ आगे बढ़े। पुलिस लाइन से निकली यात्रा अंबेडकर चौराहा, ईव्ज
चौराहा, बच्चा पार्क, राजकीय इंटर कॉलेज और सोतीगंज होते हुए बेगमपुल पहुंची। रास्ते
में लोगों ने तिरंगा यात्रा का उत्साह बढ़ाया। बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी
यात्रा में शामिल हुईं।
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