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Tuesday, August 11, 2026

मुझे तुम अच्छे लगते हो...—डॉ शबनम सुल्ताना की कविता

नित्य संदेश

मुझे तुम अच्छे लगते हो

मुझे तुम अच्छे लगते हो

बताओ मेरा कसूर क्या है ?

मुझे बस तुम ही सच्चे लगते हो

बताओं मेरा कसूर क्या है ?

मुझे गले लगाकर तुम रखते हो, 

मुझे तुम हर वक्त अपना कहते हो, 

तुम्हारे पास रहने से,

मुझे हर वक्त मेहफूज लगता है।

तुम जब आस-पास होते हो, 

मैं बच्चों सी हो जाती हूं।

किसी नाज़ुक सी तितली की तरह,

हर तरफ़ उड़ती रहती हूं।

मैं कैसे तुम्हें बतलाऊं, 

मैं कितना खुश रहती हूं।

मुझे न कोई ग़म सताता है

न किसी से डर लगता है।

तुम जब पास रहते हो, 

मैं कितनी मेहफूज रहती हूं।

तुम्हारी बांहों के झूलों में,

मुझे अपने आप अच्छा लगता है।

तुम्हारे होने के एहसास से,

मुझे खुद पर प्यार आता है।

मुझे तुम अच्छे लगते हो,

बताओं मेरा कसूर क्या है ?



—डॉ शबनम सुल्ताना

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