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Tuesday, August 11, 2026

​गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित: अभिव्यक्ति संस्था भोपाल द्वारा गुरु सम्मान एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन

नित्य संदेश, भोपाल। अभिव्यक्ति साहित्यिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संस्था, भोपाल ने भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत गुरु सम्मान एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री प्राप्त श्री नारायण व्यास जी ने की तथा विशिष्ट अतिथि श्री महेश सक्सेना जी (निदेशक, बाल साहित्य शोध केंद्र, भोपाल) रहे। मुख्य अतिथि डॉ. नारायणी शुक्ला जी (शिक्षाविद, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवयित्री), विशेष अतिथि डॉ. उषा खरे जी (सेवानिवृत्त प्राचार्य) एवं डॉ. निलिम्प त्रिपाठी जी (प्रख्यात कथाव्यास एवं ज्योतिषाचार्य) थीं। विशेष - सांदीपनि गुरु सम्मान प्रख्यात शिक्षाविद एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रेम भारती जी को प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सम्मानित होने वाली अन्य विभूतियाँ: श्री गोकुल सोनी जी, श्री अशोक धामेनिया जी, श्रीमती कल्पना विजयवर्गीय जी, श्री सुरेश पटवा जी, श्री दिनेश भदौरिया जी, श्री रमेश श्रीवास्तव 'नंद' जी, श्री कृष्ण कुमार दुबे जी, श्री किशन तिवारी जी, श्रीमती सुनीता शर्मा 'सिद्ध' जी, श्री राजेंद्र शर्मा 'अक्षर' जी, डॉ. गौरी शंकर 'गौरीश' जी, डॉ. आशा अग्रवाल जी, श्री राम वल्लभाचार्य जी, श्री ऋषि श्रृंगेरी जी, डॉ. आभा बाजपेयी जी, श्री अशोक निर्मल जी एवं डॉ. मालती बसंत जी को गुरु सम्मान से सम्मानित किया गया।

संस्था की अध्यक्ष डॉ. अनीता तिवारी ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि "राष्ट्र के निर्माण में गुरुओं की अहम भूमिका है, गुरु ही राष्ट्र के निर्माता हैं।"

मधुलता शर्मा का गरिमामय संचालन मंच को ऊर्जावान करता रहा। शांतिपूर्ण व सुचारू व्यवस्था वंदना अतुल जोशी की रही। अभिव्यक्ति संस्था की उपाध्यक्ष सरोज दवे 'सवि' ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "गुरु पर्व के इस पावन प्रेरणामय अवसर पर हम सभी संस्था की ओर से श्री गुरु के चरणों में अपनी हार्दिक कृतज्ञता और सम्मान अर्पित करते हुए इस पावन उत्सव पर अपने हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करते हैं। गुरु केवल ज्ञान के प्रदाता नहीं होते, वे जीवन के पथ-प्रदर्शक, संस्कारों के संवाहक और व्यक्तित्व के निर्माता होते हैं। गुरु ने ही अपने ज्ञान, तप और त्याग से विद्यार्थी एवं समाज जनों के जीवन को आलोकित किया है।"

​गुरु ही संवारते हैं

राष्ट्र का स्वरूप,

राष्ट्र प्रेम भाव भर

सुपथ का निर्माण कर।

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