हस्तिनापुर के आश्रम पद्धति विद्यालय में डीएम वी.के. सिंह ने औचक निरीक्षण के दौरान बच्चों से पढ़ाई के साथ उनकी पसंद-नापसंद जानी
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। अफसरी की अपनी एक औपचारिक दुनिया होती है, लेकिन रविवार को हस्तिनापुर के राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में जिलाधिकारी वी.के. सिंह ने कुछ देर के लिए इस औपचारिकता को पीछे छोड़ दिया। औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे डीएम बच्चों के बीच ऐसे घुल-मिल गए कि माहौल किसी सरकारी निरीक्षण के बजाय परिवार के बड़े और बच्चों के बीच होने वाली आत्मीय बातचीत जैसा हो गया। उन्होंने बच्चों के बीच बैठकर पढ़ाई पूछी, पहाड़े सुने, सामान्य ज्ञान के सवाल किए और फिर उनकी पसंद-नापसंद भी जानी।
डीएम ने बच्चों से पूछा कि विद्यालय में खाने में क्या-क्या मिलता है और उन्हें कौन सा भोजन सबसे अधिक पसंद है। बच्चों ने भी बिना संकोच अपनी बातें साझा कीं। डीएम ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और यह जानने का प्रयास किया कि विद्यालय में रह रहे बच्चों को किन सुविधाओं की जरूरत है। इसके बाद डीएम और अन्य अधिकारियों ने बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया। अधिकारियों को अपने बीच बैठा देखकर बच्चों के चेहरों पर भी सहज खुशी नजर आई। विद्यालय के वार्डन ने बताया कि यहां कुल 284 बच्चे पंजीकृत हैं। निरीक्षण के दौरान 200 से अधिक बच्चे उपस्थित मिले। रक्षाबंधन के चलते कुछ बच्चे अवकाश लेकर अपने घर गए हुए हैं। डीएम ने विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ बच्चों की सुविधाओं को लेकर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय तक जाने वाली सड़क का निर्माण बरसात समाप्त होने के बाद शुरू कराया जाएगा। विद्यालय में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम हर महीने निरीक्षण करेगी। जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिया कि विद्यालय को जिन सुविधाओं और वस्तुओं की आवश्यकता है, उनका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाए, ताकि जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई हो सके। इस दौरान सीडीओ नूपुर गोयल, एसडीएम मवाना संतोष कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार, सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारी महीने में एक दिन बच्चों के बीच बिताएं
डीएम ने अधिकारियों से कहा कि वे अपनी रुचि के विषय के अनुसार महीने में कम से कम एक बार विद्यालयों में जाकर बच्चों को पढ़ाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों का विकास केवल पाठ्यक्रम पूरा करने से नहीं होगा। उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए संवाद, प्रोत्साहन और अपनापन भी जरूरी है। रविवार को विद्यालय में डीएम की मौजूदगी इसी संवेदना की तस्वीर बन गई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं की कमियां खोजने से अधिक यह समझने पर जोर दिया कि बच्चों को क्या चाहिए और वे विद्यालय में किस तरह का अनुभव कर रहे हैं। एक अधिकारी का बच्चों के साथ बैठकर भोजन करना उनके लिए महज एक साथ खाना नहीं था, बल्कि यह भरोसा दिलाने जैसा था कि उनकी बातें सुनने और उनकी जरूरतों को समझने वाला कोई उनके साथ खड़ा है।


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