

नित्य संदेश, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के विलक्षण प्रतिभा के धनी अनघ चित्तौड़ा ने अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति और गणितीय क्षमता के बल पर एक बार फिर पूरे प्रदेश और देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। अनघ ने मात्र 10 मिनट 48 सेकंड में 50 संस्कृत मंत्रों और श्लोकों का शुद्ध उच्चारण के साथ पाठ करके 'वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में अपना तीसरा विश्व रिकॉर्ड दर्ज कराया है। इस गौरवशाली उपलब्धि को 29 जून 2026 को उनके सातवें जन्मदिन पर आधिकारिक स्वीकृति मिली थी, जिसका प्रमाण पत्र हाल ही में उनके परिवार को प्राप्त हुआ है।

इससे पूर्व भी अनघ अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए दो विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने अपना पहला रिकॉर्ड मात्र 3 वर्ष 11 माह 13 दिन की उम्र में बनाया था, जब उन्होंने 10 करोड़ तक की 50 जोड़ी बड़ी-छोटी 9-अंकीय संख्याओं की तुलना केवल 5 मिनट 20 सेकंड में पूरी कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था। इसके बाद महज 4 वर्ष 9 दिन की आयु में उन्होंने 3 मिनट 1 सेकंड में 50 प्रकार के मसालों की सटीक पहचान कर अपना दूसरा विश्व रिकॉर्ड कायम किया था।

अनघ की इस सांस्कृतिक और बौद्धिक उपलब्धि के पीछे उनकी माता श्रद्धा चित्तौड़ा की वर्षों की कड़ी मेहनत, समर्पण और मार्गदर्शन है, जिन्होंने अनघ को मात्र दो वर्ष की आयु से ही संस्कृत श्लोकों का अभ्यास कराना शुरू कर दिया था। इस सफलता में उनके पिता प्रणय चित्तौड़ा के निरंतर प्रोत्साहन और दादा-दादी व नाना-नानी के सामूहिक पारिवारिक संस्कारों का भी अमूल्य योगदान रहा है। इतनी कम उम्र में भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और श्रेष्ठ संस्कारों को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने वाली अनघ की यह उपलब्धि न केवल इंदौर शहर के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
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