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Tuesday, August 18, 2026

फेक न्यूज़ की जगह नेक न्यूज़ को भी जगह मिले : डॉ. मोहन यादव


• एमसीयू के नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन के तीन दिवसीय आयोजन 'अभ्युदय-2026' का उद्घाटन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रसिद्ध कलाकार पीयूष मिश्रा हुए शामिल


प्रो. पवित्र श्रीवास्तव

नित्य संदेश, भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि युवा 'फेक न्यूज़' के जमाने में 'नेक न्यूज़' वाले मीडिया कर्मी बनें। पत्रकारिता में सत्ता का विरोध ठीक है, लेकिन देश विरोध नहीं होना चाहिए। हमारे लिए न्यूज़ से ऊपर नेशन हो, देश हित को हम सर्वोपरि रखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन के तीन दिवसीय आत्मीय आयोजन 'अभ्युदय-2026' में मुख्य अतिथि के नाते शामिल हुए। विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रसिद्ध कलाकार पीयूष मिश्रा उपस्थित रहे। अध्यक्षता कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने की।


उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संचार के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में लव-कुश की कथा का वर्णन किया। इसी प्रकार, उन्होंने श्रेष्ठ संचारक के रूप में देवर्षि नारद का उदाहरण भी दिया। वीर सावरकर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि सावरकर जी ने लंदन जाकर अंग्रेजों को चुनौती दी। उन्होंने 1857 का वास्तविक इतिहास लिखकर सिद्ध किया कि यह सिपाही विद्रोह नहीं अपितु स्वाधीनता का आंदोलन था। सावरकर जी ने हिंदी की भी खूब सेवा की। संसदीय परंपरा के अनेक शब्द सावरकर जी ने दिए हैं। गीतकार कवि प्रदीप का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने गीतों से स्वाधीनता की अलख जगाई, जिसके कारण वे अंग्रेजों के निशाने पर आए। हमारे साहित्यकारों ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया।


स्वागत भाषण में कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि युवाओं को नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए। अपने इतिहास के किरदारों से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी कोई माता-पिता अपने बच्चों का नाम शकुनी और मंथरा नहीं रखते हैं। यह हमारे लिए संकेत है कि हमें सब प्रकार की नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हम किसी के अच्छे कार्य में कोई सहयोग नहीं कर सकते, तब कम से कम उनके कामों में बाधक न बनें।


पीयूष मिश्रा के साथ 'टॉक शो'

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के 'अभ्युदय-2026' में प्रख्यात लेखक, गीतकार और अभिनेता पीयूष मिश्रा के साथ 'टॉक शो' में 2009 बैच की विद्यार्थी निशा थरानी और कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने उनके साथ बातचीत की। इस बातचीत में विद्यार्थियों के प्रश्नों को भी शामिल किया गया। पीयूष मिश्रा ने बताया कि एक कलाकार दिल से अपनी कला का प्रदर्शन करता है। उन्होंने बताया कि मैं 40 मिनट वॉक करता हूँ और 40 मिनट रियाज। आजकल नियमित ध्यान का अभ्यास भी कर रहा हूँ।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि मुझ पर स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद का प्रभाव रहा है। उन्होंने कहा कि जहां पॉलिटिक्स खत्म होती है, वहां से अध्यात्म शुरू होता है। जेन-जी पर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि जेन-जी बहुत स्मार्ट हैं। जेनरेशन गैप है लेकिन सभी जेनरेशन में युवाओं को भगत सिंह याद रहते हैं। युवाओं को स्वामी विवेकानंद भी याद रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि भगत सिंह, महात्मा गांधी और सरदार पटेल के दौर में सोशल मीडिया होता तो उनको भी ट्रोल किया जा सकता था। हमें यह नहीं करना है। अपने महापुरुषों को ट्रोल करने से बचें।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हमें जमकर काम करना चाहिए। काम करने में आनंद आना चाहिए। उन्होंने कहा कि किताबों को पढ़ने का अभ्यास बढ़ाएं। किताबों में खूब आनंद है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि हमें अपने काम में 'एक्स्ट्रा ऑर्डनरी' होना चाहिए। असम में आई प्राकृतिक आपदा में जाकर सहयोग करने का आह्वान भी पीयूष मिश्रा ने इस टॉक शो के दौरान किया। इस बातचीत के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के आग्रह पर अपने कुछ गीत भी सुनाए।


पूर्व विद्यार्थियों ने अपने अनुभवों से दिए सफल करियर के टिप्स

'अभ्युदय-2026' के पहले सत्र को पूर्व विद्यार्थी श्यामलाल यादव, पदम भंडारी, डॉ. विश्वेश ठाकरे, संदीप रघुवंशी, शिल्पा अग्रवाल और विकास सिंह ने नवागत विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अपने अनुभव और अपनी यात्रा को साझा किया। वरिष्ठ पत्रकार श्यामलाल यादव ने कहा कि खोजी पत्रकारिता में एक-एक स्टोरी को करने में समय लगता है। अपनी एक स्टोरी का उदाहरण देकर उन्होंने खोजी पत्रकारिता में आरटीआई के उपयोग की जानकारी दी।

जनसंपर्क के क्षेत्र में कार्यरत पूर्व विद्यार्थी विकास सिंह ने कहा कि चीजों को देखने का अपना नजरिया होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'आउट ऑफ बॉक्स' सोचना चाहिए। क्रिएटिव मीडिया में कार्यरत शिल्पा अग्रवाल ने कहा कि करियर में क्या करना है, यह तय करने से पहले अधिक से अधिक एक्सप्लोर करना। टीवी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. विश्वेश ठाकरे ने कहा कि सबसे पहले तय कीजिये कि हमारा सामर्थ्य क्या है, हम अपने आप को जांचे कि हम किस काम के लिए बने हैं। उन्होंने नए विद्यार्थियों को कहा कि आप सुनहरे समय में हो। आपके पास सीखने के लिए बहुत संसाधन हैं।


प्रसिद्ध उद्घोषक पदम प्रसाद भंडारी ने कहा कि मीडिया को टकराने की जगह, सुझावात्मक ढंग से मुद्दों पर अपनी राय देनी चाहिए। शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत संदीप रघुवंशी ने नए विद्यार्थियों से आग्रह किया कि आप भी प्रायोगिक कक्षाएं जरूर करना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र भदौरिया ने कहा कि पत्रकारिता की तीन बातें कभी नहीं बदलेंगी- सत्य, तथ्य और कृत्य। हमेशा ही पत्रकारिता का प्रभाव रहेगा। यदि हम सत्य और तथ्य में विचारों का घालमेल नहीं करेंगे तो पत्रकारिता का महत्व बना रहेगा। जनसंपर्क के क्षेत्र में सक्रिय हृदय गुप्ता ने कहा कि सबसे अधिक अवसर जनसंपर्क के क्षेत्र में हैं। हमें केवल नौकरी के बारे में नहीं सोचना चाहिए बल्कि अपने स्वयं के कार्य के बारे में भी विचार करना चाहिए।

क्रिएटिव फील्ड में कार्यरत अश्विनी मिश्रा ने कहा कि कोई भी क्रिएटिव कार्य अकेले नहीं होता है। उसके पीछे कई लोगों के विचार और अनुभव होते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में आपके मन में कोई हिचक और डर नहीं होना चाहिए। विज्ञान पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. अंकिता मिश्रा ने कहा कि नए विद्यार्थियों को अपने शब्द भंडार को अभी समृद्ध करना चाहिए। सिनेमा के क्षेत्र में कार्यरत निशा थरानी ने कहा कि आप माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि हैं। आप जहां भी जाएंगे वहां आपको विश्वविद्यालय के मूल्यों को प्रस्तुत करना है। दादा माखनलाल की विरासत को आगे बढ़ाना है।

वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय ने विश्वविद्यालय से लेकर वर्तमान करियर तक की यात्रा का वर्णन करके विद्यार्थियों को अच्छा करियर बनाने से सूत्र दिए। कंप्यूटर के क्षेत्र में कार्यरत अचिन्द्र भटनागर ने कहा कि हमें 'रिस्क टेकर' होना चाहिए। जो उपलब्ध है, उसका बेहतर उपयोग करके सीखें। यहां से स्किल्स सीखकर, आत्मविश्वास लेकर और अपने करियर की दिशा लेकर जाएं।

कंप्यूटर और तकनीक के क्षेत्र में कार्यरत सिद्धार्थ मुखर्जी ने कहा कि विश्वविद्यालय में मुझे 'लर्निंग एप्टीट्यूड' दिया, जो कदम-कदम पर मुझे काम आया। टीवी पत्रकार आदित्य श्रीवास्तव ने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने मुझे बताया कि पत्रकार वह है जो दुनिया को जानने की जिज्ञासा रखता है। उन्होंने नए विद्यार्थियों से कहा कि अगले दो साल में उन सभी स्किल्स को सीख लें, जो पत्रकारिता के क्षेत्र में काम आने वाली हैं। टीवी पत्रकार एवं एंकर पराक्रम शेखावत ने कहा कि काम करते समय हमसे गलतियां होंगी, लेकिन अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं होने देना है। हमें अपनी गलतियां स्वीकार करना चाहिए। गलती स्वीकार करेंगे तभी हम अपनी गलतियों से सीख सकते हैं। एक बात जरूर सीखें कि गलतियों को दोहराना नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अपने आप को कमतर नहीं आंकना है।

विशेषांक विमोचित :

इस अवसर पर हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम 'प्रणाम उदन्त मार्तण्ड' पर केंद्रित पुस्तक 'दो सदी साक्षी है', विकल्प का विशेषांक 'मैं क्लासरूम' और मंदिर की अर्थव्यवस्था पर केंद्रित पत्रिका 'इंडियन कलाईडोस्कोप' का विमोचन किया गया।


 

प्रतिभा सम्मान :

इस अवसर पर अपने कोर्स में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों- परिधि पुजारा, तमन्ना लश्कर और शिविका गुप्ता को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।


खबर : विभागाध्यक्ष, जनसम्पर्क विभाग द्वारा

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