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Monday, July 6, 2026

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में "नग़्मों से सजी शाम" का आयोजन


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस प्रकार के कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी पुरानी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। इनके माध्यम से युवा पीढ़ी न केवल पुराने कलाकारों और उनकी अमूल्य शास्त्रीय धरोहर से परिचित होती है, बल्कि इस विरासत को सुरक्षित रखने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की प्रेरणा भी प्राप्त करती है। शास्त्रीय कला कभी पुरानी नहीं होती। उसकी महत्ता हर युग में बनी रहती है और वह प्रत्येक पीढ़ी को प्रभावित करती है। जहाँ ऐसी संगीत सभाएँ युवाओं का मनोरंजन करती हैं, वहीं वरिष्ठ लोगों की पुरानी स्मृतियाँ भी ताज़ा हो जाती हैं तथा उनमें नया उत्साह और उमंग का संचार होता है।

उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्रम अत्यंत उत्कृष्ट रहा। दोनों कलाकारों ने बेहतरीन नग़्मे प्रस्तुत किए। इस प्रकार के कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते रहने चाहिए। विद्यार्थियों के लिए भी ऐसे कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक होते हैं। इससे उन्हें आगे बढ़ने का उत्साह मिलता है और उनकी प्रतिभा को नई दिशा मिलती है। वे चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के उर्दू विभाग द्वारा प्रेमचंद सेमिनार हॉल में आयोजित "नग़्मों से सजी शाम" कार्यक्रम के समापन अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ रोहासा (मेरठ) के प्रसिद्ध गायक गुलफ़ाम ने अपनी मधुर आवाज़ में "आने से उसके आए बहार, जाने से उसके जाए बहार", "जो बात तुझ में है तेरी तस्वीर में नहीं", "रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ" तथा "मेरे दोस्त किस्सा ये क्या हो गया" जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर किया, जिनसे पूरा सभागार संगीत के रंग में रंग गया।

श्रोताओं के विशेष आग्रह पर उन्होंने "बड़ी दूर से आए हैं", "ओ दुनिया के रखवाले", "ये झुके-झुके नैना", "मुझे प्यार की ज़िंदगी देने वाले" तथा ग़ज़ल "हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफ़िर की तरह" भी प्रस्तुत की, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा। दूसरे कलाकार मुहम्मद सलीम अख्तर ने भी अपनी सुरीली आवाज़ में "जाने वालों ज़रा", "ये शम्मा तो जली रोशनी के लिए" तथा "बाज़ी किसी ने प्यार में जीती या हार दी" प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी।

दोनों कलाकार देश के विभिन्न शहरों में अपनी गायकी का जादू बिखेर रहे हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक एवं संगीत विरासत से परिचित कराना तथा उन्हें कला की बारीकियों से अवगत कराना है। इस अवसर पर प्रो. विकास शर्मा, प्रसिद्ध शायर सैयद नायाबुद्दीन 'नायाब', डॉ. शादाब अलीम, डॉ. इरशाद सियानवी, हाजी सलीम सैफ़ी, मेराज अहमद, मुहम्मद शमशाद, सईद अहमद सहारनपुरी, मुहम्मद इमरान, मुहम्मद शाहवीज़ सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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