नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षा विभाग में डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल एवं जयदेव सिंह द्वारा डिजिटल रैगिंग जागरूकता स्केल का विकास एवं मानकीकरण किया गया है। यह स्केल द्विभाषी (हिन्दी एवं अंग्रेज़ी) रूप में तैयार किया गया है तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों में डिजिटल रैगिंग के प्रति जागरूकता का वैज्ञानिक एवं वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल ने बताया कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग, ऑनलाइन गेमिंग, ई-मेल तथा अन्य डिजिटल संचार माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ रैगिंग की घटनाएँ केवल परिसर तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि उनका विस्तार डिजिटल एवं आभासी माध्यमों तक हो गया है। इस बदलते परिदृश्य में विद्यार्थियों के बीच डिजिटल रैगिंग के स्वरूप, उससे जुड़े जोखिमों तथा सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूकता का मूल्यांकन करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2009 में जारी उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग पर प्रतिबंध एवं रोकथाम के लिए यूजीसी विनियम रैगिंग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा प्रदान करते हैं। इसके बावजूद डिजिटल माध्यमों में होने वाली रैगिंग के प्रति विद्यार्थियों की जागरूकता का आकलन करने के लिए एक मानकीकृत मापन उपकरण का अभाव था। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस स्केल का विकास किया गया है। यह स्केल स्नातक स्तर के विद्यार्थियों पर प्रशासित एवं मानकीकृत किया गया है। वैज्ञानिक मनोमितीय सिद्धांतों के अनुसार विकसित इस स्केल की विश्वसनीयता एवं वैधता का परीक्षण किया गया है, जिससे यह शोध एवं शैक्षिक उपयोग के लिए एक प्रमाणिक उपकरण सिद्ध होता है।
डिजिटल रैगिंग जागरूकता स्केल में कुल 35 कथन सम्मिलित हैं, जिन्हें पाँच प्रमुख आयामों में विभाजित किया गया है। इनमें डिजिटल रैगिंग की समझ, डिजिटल रैगिंग के प्रकार एवं स्वरूप, कानूनी जागरूकता एवं संस्थागत नीतियाँ, प्रतिक्रिया एवं रिपोर्टिंग तथा रोकथाम एवं सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इन आयामों के माध्यम से विद्यार्थियों की डिजिटल रैगिंग से संबंधित जानकारी, विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन उत्पीड़न की पहचान, कानूनी प्रावधानों एवं संस्थागत व्यवस्थाओं की समझ, शिकायत दर्ज कराने की तत्परता तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूकता का समग्र मूल्यांकन किया जा सकता है।
यह स्केल विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षक-शिक्षा संस्थानों तथा शिक्षा एवं मनोविज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण शोध उपकरण सिद्ध होगा। इसके माध्यम से शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों में डिजिटल रैगिंग के प्रति जागरूकता के स्तर का आकलन कर सकेंगे, जागरूकता संबंधी कमियों की पहचान कर सकेंगे तथा अधिक प्रभावी एंटी-रैगिंग कार्यक्रम एवं जागरूकता अभियान संचालित कर सकेंगे। साथ ही, यह उपकरण UGC एंटी-रैगिंग विनियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने में भी उपयोगी सिद्ध होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप विकसित यह डिजिटल रैगिंग जागरूकता स्केल भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त डिजिटल वातावरण के निर्माण, उत्तरदायी डिजिटल नागरिकता को प्रोत्साहित करने तथा डिजिटल रैगिंग की रोकथाम से संबंधित अनुसंधानों एवं नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा।


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