• एमसीयू में एआई एफडीपी का समापन
नित्य संदेश ब्यूरो
भोपाल। ज्ञान की महत्ता सर्वोपरि होती है। मानवीय चेतना और बुद्धि का विकल्प एआई नहीं हो सकती है। तकनीकें बदलती रहती हैं लेकिन केवल ज्ञान ही है जो स्थाई रहता हैं। आज इसी ज्ञान के आधार पर मशीने एआई जैसी तकनीक से संचालित हो रही हैं। एआई जैसी तकनीकों के बारे में आमजन को शिक्षित करने में मीडिया की अहम भूमिका है। यह बात एमसीयू में संचालित एआई एफडीपी के समापन सत्र पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और आईआईआईटी के निदेशक प्रोफेसर आशुतोष कुमार सिंह ने कही। श्री सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि एआई तकनीक सीखने वालों के लिए सर्वाधिक अवसर बनेंगे। उन्होंने कहा कि एआई और रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि एआई से अनेकों रोजगार सृजित होंगे। इससे किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है बल्कि इसे सीखकर नए अवसर बनाए जा सकते हैं।

एमसीयू के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि मीडिया के न्यूजरूम में बहुत तेजी से बदलाव आ रहे हैं। आज जो टूल और टेक्नोलाजी वहां उपयोग हो रही है वह एक सप्ताह या उससे भी कम वक्त में बदल जी रही है। इसका मूल कारक एआई है। इसी विचार से पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सिलेबस में एआई का समावेश किया गया है ताकि विद्यार्थी इसे सीखें। यह फैकल्डी डेवलपमेंट प्रोग्राम इस दिशा में एक शुरूआती कदम है जिसमें हमारे प्राध्यापकों ने दस दिन प्रशिक्षण लिया है। इसका लाभ हमारे विद्यार्थियों को मिलेगा। श्री तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यायल प्रतिदिन एआई के क्षेत्र में हो रहे बदलावों के साथ अपने सिलेबस और शिक्षण-प्रशिक्षण को भी अपडेट करता रहेगा।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. प्रदीप डहेरिया की लिखी पुस्तक जनमाध्यम युवा और मीडिया साक्षरता, का विमोचन अतिथियों ने किया। इस दस दिनों के इस एफडीपी के विविध सत्रों की विस्तृत रिर्पोट प्रोफेसर सीपी अग्रवाल ने प्रस्तुत की। सत्र का संचालन इस एफडीपी के समन्वयक और विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के विभागाध्यक्ष डा. पवित्र श्रीवास्तव ने की। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और विशेषज्ञों का अभार कुलसचिव डा. पी शशिकला ने माना।
डा पवित्र श्रीवास्तव
विभागाध्यक्ष
विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग, एमसीयू, भोपाल


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