
• इंदौर में जीवंत हुई महाराष्ट्र की 800 वर्ष पुरानी वारकरी परंपरा

• 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकली मातोश्री अहिल्याबाई होल्कर को समर्पित पालकी यात्रा
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। सर्व मराठी भाषी संघ के तत्वावधान में शनिवार को इंदौर के इतिहास की सबसे भव्य एवं ऐतिहासिक दिंडी यात्रा का सफल आयोजन हुआ। राजवाड़ा से प्रारंभ होकर पंढरीनाथ मंदिर (हरसिद्धि चौराहा) तक निकली इस भव्य यात्रा में 10 हजार से अधिक मराठी भाषी श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर मराठी संस्कृति, परंपरा और भगवान श्री हरी विट्ठल के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का परिचय दिया। पूरे मार्ग पर "श्री हरी विट्ठल" के जयघोष, भजन-कीर्तन, ढोल-ताशे, लेझीम और पारंपरिक वाद्यों की गूंज से पूरा इंदौर भक्तिमय वातावरण में रंग गया।

आयोजन का प्रमुख आकर्षण मातोश्री अहिल्याबाई होल्कर को समर्पित भव्य पालकी यात्रा रही। लगभग 252 वर्षों पूर्व मातोश्री अहिल्याबाई होल्कर के शासनकाल में निकाली जाने वाली पारंपरिक यात्रा के स्वरूप को एक बार फिर इंदौर में जीवंत किया गया। श्रद्धालुओं ने ध्वज के साथ मातोश्री की प्रतिमा को साक्षी मानकर ऐतिहासिक यात्रा में सहभागिता की। यह आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। लगभग 40 वर्षों से इंदौर में अलग-अलग निकल रही 7 दिंडियों को पहली बार एक मंच पर लाया गया, जिससे मराठी समाज की अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली।

आयोजन को मध्य प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी दिंडी यात्रा माना जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा में पारंपरिक मराठी वेशभूषा, भगवा ध्वज, बैलगाड़ियां, लेझीम, ढोल-ताशे, पारंपरिक वाद्य, लोकनृत्य, भजन-कीर्तन और विठ्ठल नाम संकीर्तन ने महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भव्य झलक प्रस्तुत की। यह आयोजन 800 वर्षों से चली आ रही मराठी गौरव और वारकरी संस्कृति की परंपरा का अद्भुत संगम बनकर सामने आया।

इस अवसर पर समाज के ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य सहित सभी समाजों के नागरिक एक मंच पर आए और सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। श्रद्धालुओं के उत्साह, अनुशासन और भक्ति ने इस आयोजन को इंदौर के सांस्कृतिक इतिहास का अविस्मरणीय अध्याय बना दिया। सर्व मराठी भाषी संघ की अध्यक्ष श्रीमती स्वाति काशिद ने कहा कि "यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मराठी समाज की एकता, संस्कृति और भगवान श्री हरी विट्ठल के प्रति हमारी अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा, 10 हजार से अधिक लोगों का यह भव्य आयोजन इस बात का प्रमाण है कि मराठी समाज अपनी परंपराओं और संस्कृति को जीवंत रखने के लिए एकजुट है। सभी दिंडियों और समाजों को एक मंच पर लाने का यह प्रयास भविष्य में मराठी भाषियों की एकता का स्वर्णिम अध्याय सिद्ध होगा।"

उन्होंने आयोजन को सफल बनाने वाले सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों, सामाजिक संगठनों, प्रशासन, पुलिस एवं मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक दिंडी यात्रा आने वाले वर्षों में इंदौर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण उत्सव बनेगी।
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