Breaking

Your Ads Here

Saturday, July 25, 2026

"संस्कार" —वर्षा व्यास की एक लघुकथा

 
नित्य संदेश
 

संस्कार 

​अपने पिता द्वारा दादाजी को अपशब्द बोलते देख पाँच साल के मासूम बालक ने भी दो दिन बाद किसी बात पर अपने पिता के लिए वही शब्द दोहरा दिए। तभी एक जोरदार थप्पड़ बच्चे के गाल पर पड़ा। वह जोर-जोर से रोने लगा। पिता डांटने लगे। फिर बोले कि इतने अच्छे, महंगे स्कूल में पढ़ा रहे हैं और तू इतने गंदे शब्द कहाँ से सीख कर आया।

​बच्चा सुबकते हुए अपने गाल को सहलाते हुए बोला— "आप भी तो अपने पापा से ऐसे ही बोलते हो। आपके पापा ने तो आपको ऐसे नहीं मारा।"

​ये शब्द सुनकर, शब्दविहिन सन्नाटा पसर गया।


—वर्षा व्यास 

(लेखिका गृहस्वामिनी हैं )  

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here